दिल्ली यूनिवर्सिटी में जातिवाद का एक नया मामला सामने आया है जिसमें सेलेक्शन के बाद आंबेडकर कॉलेज, नई दिल्ली ने जॉइन कराने से इंकार कर दिया. दिल्ली यूनिवर्सिटी में इस बार जातिवाद का शिकार होने वाली पूनम तुषामड़ हैं जो अनुसूचित जाति समुदाय से आती है.

एक तरफ जहाँ यह कह कर प्रचारित किया जाता है कि “आरक्षित समूह” में योग्यता की कमी होती है जिसके कारन सांस्थानिक क्षमता (institutional efficiancy) प्रभावित होती है, वहीँ दूसरी ओर इन समुदायों के प्रखर लोगो को इससे दूर रखा जाता है. ऐसे कई मामले सामने आएं हैं जिसमें यह सुनिश्चित किया जाता है कि “आरक्षित समूह” के प्रखर लोगो का सेलेक्शन न हो अगर हो जाए तो जॉइन न कर पाए और अगर जॉइन कर लिया है तो उसे किसी तरह सिस्टम से बाहर किया जाए.

पूनम तुषामड़ इसी की शिकार हुई है. पूनम अनुसूचित जाति समुदाय से आती है लेकिन वे एक प्रखर विद्वान है और अगर आरक्षण न हो तब भी योग्यता के अनुसार वे यूनिवर्सिटी फैकल्टी होने की काबिलियत रखती है.

हिंदी साहित्य जगत में पूनम तुषामड़ एक कवियित्री के रूप में स्थापित है. हिंदी साहित्य के साथ-साथ वे समाजिक आंदोलनों में खासे सक्रीय हैं. देश में अनुसूचित जाति पर हुए कई हमले में तथ्य अन्वेषण समिति (fact finding committee) की सदस्य रही है.

मई 2010 में हरियाणा की मिर्चपुर में जब एक भिन्न रूप से सक्षम एक लड़की को उसके पिता के साथ जिन्दा जलाने की घटना हुई थी, जिसमें अनुसूचित जाति के अठारह घर भी जला दिए गए थें. उसके तथ्य अंवेशन समुह में मेरे साथ पूनम तुषामड़ भी थी. इसके बाद हमलोग हरियाणा के पंचायत चुनाव में हुए हिंसा के तथ्य अन्वेषण में भी साथ थें.

(फैक्ट फाइंडिंग की कुछ तश्वीरें यहाँ देखी जा सकती है –
https://www.facebook.com/zanil7/media_set?set=a.391454793879)

नॉन कॉलेजिएट विमेंस एजुकेशन बोर्ड, दिल्ली यूनिवर्सिटी (NCWEB) ने उन्हें हिंदी पढ़ाने के लिए सलेक्ट किया इसके बाद जॉइनिंग लेटर भी भेजा गया. लेकिन जब वे ज्वाइन करने के लिए कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी गईं तब कॉलेज ने उन्हें ज्वाइन कराने से माना कर दिया.

2018 के प्रारम्भ में रांची यूनिवर्सिटी, झारखण्ड से सम्बंधित कई कॉलेजो ने भी सिलेक्शन के बाद कई लोगो को फैकल्टी के रूप में ज्वाइन कराने से इंकार कर दिया था.

भाजपा सरकार में उच्च शिक्षा सहित सभी जगह शोषित वंचित पिछड़ी जातियों के साथ अन्याय में बृद्धि हुई है.

पूनम तुषामड़ ने 28/10/2018 को अपने फेसबुक पर यह आपबीती लिखी –

“ये मेरा अपॉइंटमेंट लेटर है जो मुझे NCWEB ने पढ़ाने के लिए जारी किया।

“किन्तु जब मैं अम्बेडकर कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी  में पढ़ाने के लिए पहुंची तो उन्होंने मुझे यह कह कर वापिस भेज दिया कि आपको सेंटर तो यही मिला है किंतु हमारे पास ईमेल लिस्ट में आपका नाम नही भेजा गया [.. ] आप वापस जाकर NCWEB के डिरेक्टर से मिलिए वे, आपका नाम हमें भेज देंगे, या कोई दूसरा कॉलेज आप को दे देंगे।

“किन्तु जब मै NCWEB के कार्यालय पहुंची तो वहां कुछ और ही घपला चल रहा था।

“मैं समझ नही पाई कि डायरेक्टर के कमरे के बाहर तैनात की गई उन महिलाओं ने कितनी चालाकी से मुझ से मेरा अपॉइंटमेंट लेटर ले लिया और कहा मैडम आपको जल्द ही नया सेंटर काल करके बात दिया जाएगा। आप निश्चिंत रहें। नए सेंटर के लिए आपको अपॉइंटमेंट लेटर भी नया दिया जाएगा। फिर आप इस लेटर का क्या करेंगी।

“मुझे संदेह हुआ तो मैंने उनसे पूछा जब लेटर नया ही देना है तो आप क्यो हमसे ये लेटर मांग रहे हैं?

“इस पर उन्होंने चालाकी से मुस्कुराते हुए कहा मैडम हमे तो ये लेटर केवल ये जानने के लिए चाहिए कि किन किन को लेटर इशु किये गए।

“फिर भी देने से पहले मैंने इस लेटर की फोटोकॉपी करा ली थी।

“ये पोस्ट बहुत पहले लिखी जानी थी किन्तु मेरे कुछ स्वार्थी मित्रों ने मुझे रोके रखा।

“किन्तु सारा षडयंत्र समझ आने पर आज इसे साझा कर रही हूं।

“दिल्ली यूनिवर्सिटी का ये दोगला चरित्र जो दिल्ली यूनिवर्सिटी पैनल लिस्ट में 6-7 सूची वालो को खारिज करने के नाम पर SC/ST को छांट कर बाहर कर रहा है।

“क्योंकि यही छात्र हैं जो न जाने कितनी कठिनाइयों के बाद किसी तरह पीएचडी कर के यहां तक पहुचते है। जिन में से कई बहुत अच्छे अंक नही प्राप्त कर पाते किन्तु अपनी अकादमिक योग्यता पूरी करते है।

“उन्हें बड़ी सफाई से योग्यता सूची से बाहर कर दिया गया। और आज तक उन्हें कोइ कॉल नहीं आई।

“ये केवल मेरी कहानी नही है ऐसे अनेक हैं किंतु वे हताश निराश हो कर लड़ना छोड़ चुके हैं।

“मैं अभी हारी नही।”

पूनम तुषामड़ बिलकुल सही कह रहीं है. साथ ही जो पूनम तुषामड़ ने नहीं कहा है क्योकि वे खुद अपने मुँह से कहना पसंद नहीं करेगी उसे भी कहा जाना चाहिए. वह भी समाज के सामने आना चाहिए कि पूनम तुषामड़ के साथ वे लोग जातीय भेद-भाव कर रहें हैं जो कहतें हैं कि शोषित वंचित जातियों में योग्यता नहीं होती। पूनम तुषामड़ हिंदी साहित्य में पीएचडी होने के साथ-साथ हिंदी लेखन में भी काफी सक्रीय हैं. साथ ही वे कई सामाजिक आंदोलनों में सक्रीय रही है. पूनम तुषामड़ दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर होने की काबिलियत रखती हैं. वे इस कुर्सी पर बैठें हैं कई लोगो से ज्यादा काबिल हैं. पूनम तुषामड़ की यही योग्यता जातिवादी समाज में प्रगति में बाधक बन गई, जिसके कारण आज वे अतिथि शिक्षक और ठेका शिक्षक बनने के लिए संघर्ष कर रही है.

पूनम तुषामड़ की एक कविता है “क़ैद”, आशा है वे अपनी कविता पर खरे उतरेगी।

और कितनी चिनोगे
तुम दीवारें
मुझे क़ैद करके ।
मैं सेंध लगा दूँगी
हर दीवार में
बना दूँगी मार्ग
अपनी मुक्ति का ।
ग़र्क कर दूँगी
हर दर-औ-दीवार को
दीमक बन कर
कब तक रखोगे
तुम मुझको
रास्तों से बेख़बर
मैं हर रास्ते को
मंज़िल में बदल डालूँगी ।

द नेशनल प्रेस पूनम तुषामड़ के संघर्ष के साथ है, साथ ही अपील करता है कि सभी लोग उनका साथ दें. – संपादक

नोट: 
(1) पूनम तुषामड़, फेसबुक, 28/10/2018, 11.00 PM (पूनम तुषामड़ का मूल पोस्ट)
https://www.facebook.com/poonamtushamad/posts/1905096452873400
(2) नॉन कॉलेजिएट विमेंस एजुकेशन बोर्ड, दिल्ली यूनिवर्सिटी, Non Collegiate Women’s Education Board, University of Delhi, (NCWEB) के बारे में अधिक जानकारी के लिए उसके वेबसाइट को यहाँ विजिट कर सकतें हैं – http://ncweb.du.ac.in/ncweb/

Heading/ Title in English
NCWEB, University of Delhi Denied Joining After Selection: Poonam Tushamad who Belongs from Scheduled Caste Community is Victim of Casteism