नमस्कार,

मीडिया हाउस शुरू करने की प्लानिंग कई सालो से थी. भारत में विश्वसनीय मीडिया हाउस की कमी है. हालाँकि ऐसा भी नहीं है कि भारत में कोई भी मीडिया विश्वसनीय नहीं है, बल्कि इसकी संख्या काफी कम है. भरत एक विविधतापूर्ण और विशाल देश है. इसके अनगिनत पहलू आज भी अनछुयें हैं. देश में तथाकथित मेनस्ट्रीम मीडिया के खिलफ जो सबाल्टर्न मीडिया की शुरुआत हुई वह भी खरी नहीं उतरी। 

इस साल के शुरुआत में “द रिपब्लिक प्रेस” की शुरुआत की गई गई थी.  इसे काफी जनसमर्थन भी मिला। भारत के आम लोगो के साथ-साथ खास लोगो ने भी इसे काफी सकारात्मक रूप में लिया। द रिपब्लिक प्रेस की शुरुआत और संचालन काफी उत्साहवर्धक रहा. लेकिन भारत जैसे विविधतापूर्ण और विशाल देश के लिए कई मीडिया हाउस की जरुरत है. इसी क्रम में “द नेशनल प्रेस” की शुरुआत की गई है. 

आज 5 ओक्टुबर को आँचल का जन्मदिन है. 

मेरी कई जिंदगीयाँ है. मेरी जिंदगी इतनी इतनी विविध है कि उसे गिनाना मेरे लिए मुश्किल है.

आँचल भी मेरी जिंदगी है.

इस जिंगदी के जन्मदिन के अवसर पर, आज द नेशनल प्रेस की शुरुआत की गई.

वेबसाइट के लॉन्चिंग के अवसर पर पहला लेख इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम/ EVM) पर हुये सेमिनर में प्रो. विवेक कुमार के विचार हैं. 

मैं सामान्यतः किसी को कोई भी गिफ्ट नहीं देता हूँ. अगर किसी को कोई गिफ्ट दिया भी होऊँगा तो किताब दिया होऊँगा, या फिर कलम. आँचल के जन्मदिन के अवसर पर इस वेबसाइट पर  पहला लेख प्रो. विवेक कुमार, फैकल्टी, जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, द्वारा “मतदान के लिए EVM कितना लोकतान्त्रिक – कितना पारदर्शी” (ईवीएम/ EVM – इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) पर दिए गए व्याख्यान पर आधारित है को पोस्ट करने को वेबसाइट को लॉन्च करना आँचल के जन्मदिन का गिफ्ट माना जाए. हालाँकि अभी भी वेबसाइट के कई फीचर्स की टेस्टिंग चल रही है. 

आप सभी से निवेदन है कि वेबसाइट के लिए आप अपनी सामग्री भेजें। 

आँचल के जन्मदिन के शुभकामनायों सहित इस वेबसाइट के लिए भी ढेर साड़ी शुभकामनाएं।

अनिल कुमार

संस्थापक और प्रधान संपादक

संदर्भित लेख का लिंक – http://www.thenationalpress.in/2018/10/faith-and-transparency-is-bigger-question-in-the-democracy-then-the-evm-prof-vivek-kumar/