दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के शिक्षक अपने विभिन माँगो को लेकर आंदोलनरत हैं. इससे निपटने के लिए भाजपा सरकार दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेवा को “अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण कानून” (Essential Service Maintenance Act/ ESMA/ एस्मा) 1968 के अंतर्गत लाने की कोशिश कर रही है. अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण कानून नागरिको के लिए मुलभुत सेवा की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए बनाया गया है. .

UGC’s notification of 04 October 2018 regarding ESMA in DU
स्रोत: स्रोत ट्विटर – शिहाबुदीन कुंजु एस  [1]

अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) 1968 या The Essential Services Maintenance Act (ESMA) 1968 का क्लॉज़ 7 के अंतर्गत समाज में आवश्यक सेवा सुनिश्चित करने के लिए किसी व्यक्ति को पुलिस बिना किसी किसी वारंट के गिरफ्तार कर सकती है. यह कानून की धारा 7 कहता है –

7. Power to arrest without warrant. Notwithstanding anything contained in the Code of Criminal Procedure, 1898, (5 of 1898 ), any police officer may arrest without warrant any person who is reasonably suspected of having committed any offence under this Act [2].

दिल्ली यूनिवर्सिटी के शिक्षक इसका विरोध कर रहें हैं. उनका कहना है कि एस्मा सर्कुलर लोकतान्त्रिक अधिकार पर हमला है. शिक्षकों का कहना है कि इस सर्कुलर का उद्देश्य दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्वायत्तता और लोकतंत्र को ख़त्म करना है. मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) ने यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) को निर्देश दिया है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी एक्ट का स्टडी करके एस्मा लगाने के रास्ते तलाशे जाएँ.

MHRD ने अपने आदेश संख्या No. F. 4-31/2016 CU-II दिनाँक 12 सितम्बर 2018 के द्वारा UGC को यह निर्देश दिया है कि वह एक दिल्ली यूनिवर्सिटी एक्ट के अध्ययन के लिए एक वर्किंग ग्रुप का गठन करे जो आज के सन्दर्भ में परीक्षा/ शिक्षण/ अध्ययन/ मूल्यांकन को अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण कानून 1968 के तहद लाये.

MHRD के निर्देश पर UGC के पत्र की छायाप्रति ऊपर देखा जा सकता है, जिसके तहद UGC ने 04 अक्टूबर 2018 को एक कमिटी के गठन के साथ जारी किया है.

दिल्ली यूनिवर्सिटी के शिक्षको कहना कि यह शिक्षा और शैक्षणिक लोकतंत्र पर हमला है. यह भी  गौर करने की बात है कि UGC का यह पत्र उसके 01 मई 2018 के निर्देश के बाद आया है जिसमें UGC ने सभी सेंट्रल यूनिवर्सिटी के VC को पत्र लिखा है कि शिक्षकों के सेवा शर्तो को केंद्रीय नागरिक सेवा नियम (CCS) 1964 के अधीन लाया गए.

UGC द्वारा CCS लागु करने के पत्र के बारें में ज्यादा जानकारी के लिए पढ़े –
ज्ञान सृजन, यूनिवर्सिटी और लोकतंत्र के मूल दर्शन के खिलाफ है भाजपा सरकार द्वारा निर्देशित UGC का निर्देश

UGC का 01 मई 2018 का निर्देश जिसमें शिक्षकों को केंद्रीय नागरिक सेवा नियम (CCS) 1964 के अधीन लाया जा रहा है वह ज्ञान सृजन, यूनिवर्सिटी और लोकतंत्र के मूल दर्शन के खिलाफ है, क्योकि इस सेवा शर्त में यह निहित है कि “केंद्रीय कर्मचारी” सरकार के नीतियों की आलोचना नहीं कर सकतें हैं. साथ ही वे किसी भी आंदोलन में भाग नहीं ले सकतें हैं. शिक्षक सिर्फ सेवा प्रदाता नहीं बल्कि वह एक ज्ञान सृजक, ओपिनियन मेकर, नीतियों का आलोचक के साथ-साथ सामाज को एक नई दिशा भी देता है. इसलिए दिल्ली यूनिवर्सिटी के शिक्षकों का कहना है कि एस्मा लगाना शिक्षकों के साथ अन्याय और  मजाक है.

05 अक्टूबर 2018 को जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू/ JNU) के अकादमिक कौंसिल ने प्रस्ताव पारित कर शिक्षकों को केंद्रीय नागरिक सेवा नियम (CCS) 1964 के अधीन ले आया है. इसपर JNU शिक्षको ने कहा कि क्लासरूम और समाज में शिक्षकों के भूमिका को अपराधीकरण किया जा रहा है. इसे लागू करके शिक्षकों के सरकार और सरकार के नीतियों से असहमति के अधिकार को छिना जा रहा है. साथ ही शिक्षको को ऐसे  संगठनो के साथ जुड़ाव से भी रोका जा रहा है जो राजनीति में हिस्सा लेती है.

04 अक्टूबर 2018 को जारी सर्कुलर के अनुसार वर्किंग समिति को 30 दिन के अंदर अर्थात 03 नवंबर 2018 तक अपनी रिपोर्ट देना है.

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय श्री प्रकाश जावेड़कर ने ट्वीट किया है कि JNU और DU में “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” छीनने का कोई इरादा नहीं है. उन्होंने ट्वीट किया है –

“We have neither put any restrictions nor intend to put any restrictions on “Freedom of Speech” in JNU, Delhi University or any other University.
#HigherEducation , @HRDMinistry “
द्वारा: प्रकाश जावेड़कर, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री, 20/10/’18, 12:56PM [3].

इससे पहले सुबह सचिव, उच्च शिक्षा, भारत सरकार ने ट्वीट किया था –

“There is no such proposal to bring Delhi University under ESMA. The suggestion to ban strikes in the examination services came from some affected students during the DUTA strike. We have examined it and are not going ahead with the suggestion. Kindly clarify to readers.”
द्वारा: आर सुब्रह्मण्यम, सचिव, उच्च शिक्षा, भारत सरकार, 20/10/’18, 7:32AM [4].

शिक्षक समुदाय द्वारा भारी विरोध के बाद केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री के साथ-साथ सचिव, उच्च शिक्षा, भारत सरकार ने ट्वीट तो कर दिया लेकिन उस पत्र के बारे में कुछ नहीं बोला जिसे UGC ने 04 अक्टूबर 2018 को एक वर्किंग कमिटी बनाकर जारी किया है. इसी पत्र में UGC ने कहा है कि उसने यह वर्किंग कमेटी MHRD के आदेश संख्या No. F. 4-31/2016 CU-II दिनाँक 12 सितम्बर 2018 के अलोक में बनाया है. इसी पत्र के अनुसार MHRD ने UGC को यह निर्देश दिया है कि वह एक दिल्ली यूनिवर्सिटी एक्ट के अध्ययन के लिए एक वर्किंग ग्रुप का गठन करे जो आज के सन्दर्भ में परीक्षा/ शिक्षण/ अध्ययन/ मूल्यांकन को अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण कानून 1968 के तहद लाये.

MHRD के निर्देश पर UGC का पत्र की छायाप्रति ऊपर देखा जा सकता है जिसे UGC ने 04 अक्टूबर 2018 को एक कमिटी के गठन के साथ जारी किया है [1].

लोगो ने दोनों ही ट्वीट पर कमेंट कर UGC के 04 अक्टूबर 2018 के पात्र के बारे  स्पस्टीकरण माँगा है लकिन दोनों ने ही आज 21 अक्टूबर 2018 1:25PM तक कोई जबाब नहीं दिया है.

यह कोई पहला मौका नहीं है जब सरकार अपने ही पूर्व के आदेश या अपने ही किसी संगठन के कार्यो को नकारती रही है. और यह सब सिर्फ तत्कालीन गुस्से को शांत करने के लिए किया जाने वाला उपाय है, क्योकि अंततः भाजपा ने वही करने प्रयास करती है जो उसको करना है.

यहाँ यह ध्यान देने योग्य है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी को अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (Essential Service Maintenance Act/ ESMA) 1968 के अंतर्गत लाने से भी कई गुना ज्यादा खतरनाक है UGC का 01 मई 2018 का निर्देश जिसमें शिक्षकों को केंद्रीय नागरिक सेवा नियम (CCS) (Central Civil Services (Conduct) Rules, 1964) [5] के अधीन लाया जा रहा है. यह निर्देश ज्ञान सृजन, यूनिवर्सिटी और लोकतंत्र के मूल दर्शन के  खिलाफ है.

इसलिए जरुरी है कि अकादमिक आजादी के लिए समाज के सभी लोग एकजुट हों.

द नेशनल प्रेस, शिक्षको के शैक्षणिक आजादी के पक्ष में हैं.

सन्दर्भ:
[1] शिहाबुदीन कुंजु एस
https://twitter.com/skunjus/status/1053274779724042240/
[2] https://indiankanoon.org/doc/902835/ 
[3] https://twitter.com/PrakashJavdekar/status/1053548037308604416
[4] https://twitter.com/subrahyd/status/1053466411165638656
[5] https://dopt.gov.in/ccs-conduct-rules-1964 , और https://dopt.gov.in/download/acts

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