भारत में राम आस्था के नहीं चुनाव अर्थात इलेक्शन के विषय हैं. आज के राम समाज में जहर घोलने के माध्यम हैं. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जिन्होंने खुद नाथ परंपरा में दीक्षा ली है, जिसका हिन्दू धर्म से कोई लेना देना नहीं है, आज नाथ परंपरा के सन्यासी होते हुए सत्ता और कुर्सी के लिए हिन्दुवाद और राम धुन में मस्त हैं. उन्होंने तीन दिन पहले घोषण की थी कि वे प्रदेश वासियों को दिवाली का तोहफा देंगें. उन्होंने तोहफे के रूप में दिवाली के एक दिन पहले 06/11/2018 को उत्तर प्रदेश के फ़ैजाबाद जिले का नाम अयोध्या कर दिया। कुछ लोग जो मानते हैं कि राम अयोघ्या के राजा थें, उनके लिए राम अब एक छोटे से कस्बे से ऊपर उठकर एक जिला के राजा हो गएँ हैं.

इन सभी हरकतों के पीछे डर का मनोविज्ञान काम कर रहा है.

दिवाली का पर्व गौतम बुद्ध, सम्राट अशोक और बलिराजा से जुड़ा हुआ है. लेकिन साजिश के तहद इसे राम से जोड़ दिया गया. उसी साजिश को आगे बढ़ाते हुए दिवाली के एक दिन पहले दिवाली के तोहफे के रूप में राम को प्रमोट करने के लिए फ़ैजाबाद का नाम अयोध्या कर दिया गया. कल तक अयोध्या एक छोटा सा क़स्बा था. अगर राम को सच भी मान लिया जाए तो वे एक छोटे से कस्बे के राजा थें.

भाजपा जानती है कि देश की जनता उससे खफा है. देश की जनता देख रही है कैसे भाजपा के ही नेताओ के सहयोग से एक के बाद एक “व्यापारी” देश का पैसा लेकर विदेश भाग रहा है या देश से बाहर भगाया जा रहा है.

देश की जनता यह भी देख रही है कैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों की साख एक के बाद गिर रही है. सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टीगेशन (CBI), सर्वोच्च न्यायलय, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) जैसे संस्थानों के साख पर भाजपा ने बट्टा लगा दिया. पुलिस व्यवस्था को बर्बाद किया गया, ईमानदार अफसरों को झूठे केस में फंसाया गया. सेना के साजो समाज में घोटाला किया गया. राफेल डील की सच्चाई जनता के सामने लाने से कतरा रही है.

देश का किसान, जवान, मजदूर, व्यापारी, प्रोफेशनल, आम व्यक्ति सब परेशान है.

इन्हीं परेशानियों के बिच एक और परेशानी भाजपा को खाये जा रही है कि अगर बहुजन समाज पार्टी (बसपा/ BSP) और समाजवादी पार्टी (सपा/ SP) के बिच चुनावी गठबंधन हो जाता है तो 2019 के लोक सभा चुनाव में 80 सीटों में से 8 सीट भी जितना मुश्किल हो जाएगा. चुनाव जितने के लिए नए दलो जैसे जनाधिकार पार्टी और सम्यक पार्टी से भी समझौता करना पड़ सकता है, लेकिन इन दलो का विचार भाजपा से मेल नहीं खाता है इसलिए भाजपा को इसकी अधिक कीमत भी चुकानी पड़ सकती है. बिहार में जो समझौता दिख रहा है वह सिर्फ ऊपर-ऊपर है. अंतिम चुनावी समर कैसा होगा यह अभी से नहीं कहा जा सकता है.

अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के रिपोर्ट लागु होने के बाद भारत में तेजी से शोषित-वंचित जातियों (पिछडो) का ध्रुवीकरण होना शुरू हुआ. इसके काट में भाजपा ने राम को मोहरा बनाया और कहा कि आज जहाँ बाबरी मस्जिद है वहीँ राम का जन्म हुआ है. जबकि बौद्ध भी उस स्थल का अपना होने का अधिकार जताते रहें हैं.

राकेश शर्मा के डॉक्यूमेंट्री फिल्म “फाइनल सोल्युशन” के अनुसार पहले वहाँ कोई राम की मूर्ति नहीं थी, इसे बाद में 1980-90 में रखा गया था. इस फिल्म को अटल बिहारी वाजपायी सरकार और उस समय के फिल्म सर्टीफिकेशन के अध्यक्ष अनुपम खेर इसे रिलीज़ नहीं होने देना चाहतें थें.

भारतीय जनता पार्टी, विश्व हिन्दू परिषद्, और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पहले कहती रही थी कि अगर अदालत का आदेश उनके विरुद्ध आता है तो वे नहीं मानेंगें. सितम्बर 2010 में इलाहबाद हाई कोर्ट का निर्णय आता है कि जमीन को तीन टुकड़े में बांटा जाए.

उस समय मायावती के नेतृत्व में बहुजन समाज पार्टी की सरकार थी. और उत्तर प्रदेश में कहीं भी झगड़ा, दंगा, या  अप्रिय घटना नहीं होने दी. भारतीय जनता पार्टी, विश्व हिन्दू परिषद्, और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को एहसास हुआ होगा कि कानून का शासन क्या होता है? जबकि मुलायम सिंह यादव या अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी की सरकार होती या भाजपा की तो दंगे निश्चित थें. सपा और भाजपा दोनों दंगो के लाभार्थी हैं.

फिर भाजपा ने कहा कि वे इलाहबाद हाई कोर्ट ने निर्णय को नहीं मानते हैं. पुरे मन से किसी पक्ष ने निर्णय को नहीं माना और सभी सुप्रीम कोर्ट पहुँच गए.

सितम्बर 2018 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने दिल्ली में तीन दिन का कार्यशाला रखा जिसमें सर्वधर्म संभव, सभी के लिए सम्मान जैसे अच्छे शब्दों का प्रयोग किया गया. यह भी कहा गया कि वे अदालत के आदेश को मानेगें. लेकिन वे अपनी बात पर दो महीने भी कायम नहीं रह सकें और नवंबर 2018 में फिर से कहा कि राम मंदिर के लिए सरकार को अध्यादेश लाना चाहिए।

लेकिन सरकार को मालूम है यह इतना आसान नहीं है.

इसी बिच 06/11/2018 को अयोध्या जो पहले सिर्फ एक क़स्बा का नाम था उसके नाम पर एक फैलाबाद का नाम बदलकर अयोध्या कर दिया.

पहले जहाँ राम मंदिर का वादा था अब उसके नाम पर अयोध्या रेलवे स्टेशन होगा। स्टेशन को नए सिरे से बनाया जाएगा जो “प्रस्तावित” राम मंदिर की प्रतिकृति होगा. केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने घोषणा भी कर दी है कि 200 करोड़ की लागत से अयोध्या रेलवे स्टेशन को “प्रस्तावित” राम मंदिर की प्रतिकृति के रूप में बनाया जाएगा। उन्होंने 06/11/2018 को इसका शिलान्यास भी किया. लेकिन कहा कि “प्रस्तावित” राम मंदिर प्रतिकृति बनाने के लिए कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर उसकी मंजूरी ली जाएगी.

अब देखना है कौशल्या पुत्र राम भाजप को खुद वोट देंगें, या दिलाएंगे, बूथ मैनेज करेंगें या EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन/ Electronic Voting Machine) मैनेज करेंगें?