मित्रों, साधू के वेश में सदियों से बहुजन समाज के खिलाफ शैतान की भूमिका में अवतरित होने वाले दुनिया के सबसे बड़े दैविक दलाल (divine brokers) वर्ग  के लोग आगामी 25 नवम्बर 2018 को राम मंदिर निर्माण के लिए धर्म संसद आयोजित करने जा रहे हैं, जिसमे एक लाख के करीब हिन्दू कार्यकर्ताओं (divine slaves) के उपस्थित होने की सम्भावना है.

एक बच्चे तक को पता है इसका लक्ष्य निरीह दैविक गुलामों की आस्था को चैम्पियन सवर्णवादी भाजपा के वोट बैंक में तब्दील करना है. चूँकि इसके पीछे क्रियाशील शैतानों  के कुत्सित इरादों से एक बच्चा तक भी वाकिफ है, इसलिए यह मानकर चलना चाहिए कि मेच्योर मानवतावादी तथा जागरूक बहुजन भी इससे नावाकिफ नहीं होंगे।

अब सवाल पैदा होता है जो शैतान आस्था का सैलाब पैदा कर चैम्पियन सवर्णवादी भाजपा को 2019 के लोक सभा में चुनावी वैतरणी पार कराने की योजना को अमली रूप देने जा रहे हैं क्या उसकी कोई काट देश के बुद्धिजीवियों तथा  बहुजन नेतृत्व पास कहै? नहीं है कोई उपाय उनके पास, यह दावा है दुसाध का. इसकी एक मात्र काट है डाइवर्सिटी संसद.

यदि देश के बुद्धिजीवी और भाजपा  विरोधी विपक्ष,खासकर बहुजन नेतृत्व य बड़ा सम्मलेन करके यह घोषणा कर दे कि सत्ता में आने पर मिलिट्री और न्यायायिक सेवा के साथ  निजी और सरकारी क्षेत्र की सभी प्रकार की नौकरियों, सप्लाई, डीलरशिप, ठेकेदारी, पार्किंग,परिवहन, फिल्म -मीडिया के ज्ञान -सत्ता तथा धर्म-सत्ता के बंटवारा ओबीसी, एससी/एसटी, धार्मिक अल्संख्यको तथा अल्पजन सवर्ण के स्त्री-पुरुषों के संख्यानुपात में किया जायेगा. मेरा दावा है, इन विशेषाधिकारयुक्त परजीवी दैविक दलों को हिमालय की कंदराओं में पनाह लेने से भिन्न और कोई उपाय नहीं रहेगा. पर सवाल पैदा होता है कथित धर्मनिरपेक्षतावादी बुद्धिजीवी तथा विपक्ष इसके लिए सामने आएगा?

धर्म-सत्ता,ज्ञान-सत्ता, राज-सत्ता के साथ अर्थ-सत्ता पर प्रायः 90 %से ज्यादा  कब्ज़ा जमा चुके सवर्णों का शक्ति के स्रोतों पर 100% कब्ज़ा कायम करवाने के अघोषित अभियान के तहत ही हजारों साल से साधू के वेश में बहुजनों के लिए शैतान की भूमिका में अवतरित होने वाले दैविक दलालों का समूह 25 नवम्बर 2018 को धर्म-संसद आयोजित करने जा रहा है. सवर्णों का शक्ति के स्रोतों पर 100% कब्ज़ा होने से ही हिन्दू-धर्म की निर्विवाद प्रतिष्ठा कायम होगी.
क्योंकि मानव सृष्टि में  हिन्दू धर्म के दैविक सिद्धांत के मुताबिक सिर्फ हिन्दू ईश्वर के ऊत्तमांग (best organ)- मुख,बाहू और जंघे -से जन्मे लोग ही शक्ति के स्रोतों- आर्थिक, राजनीतिक, शैक्षिक और धार्मिक- के भोग के अधीकारी हैं.

बहुजनों की आर्थिक – राजनीतिक – शैक्षिक – धार्मिक क्षेत्र में न्यूनतम उपस्थिति भी हिन्दू धर्म शास्त्र और ईश्वर की अभ्रान्त्ता पर प्रश्न चिन्ह लगाती है.शैतान इस तथ्य से वाकिफ हैं, इसलिए ही वे आस्था का सैलाब पैदा कर हिन्दू धर्म-संस्कृति की ठेकेदार भाजपा को पुनः सत्ता में लाने का प्रयास कर रहे हैं. अगर भाजपा फिर से 2019 में सत्ता में  आ जाती है, उनका मंसूबा पूरा हो जायेगा.

इसका प्रतिरोध करने के लिए बहुजनों के पास  क्या डाइवर्सिटी से भी बेहतर कोई उपाय है?