बसपा के पूर्व एमएलसी और नेता हाजी इकबाल, उनके भाई एमएलसी महमूद अली और दो बेटों को उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने 23 जुलाई 2018 को गैंगस्टर एक्ट के तहत निरुद्ध कर दिया एवं पुत्र जावेद अली को गिरफ्तार कर लिया. क्षेत्र के सभी लोग जानते हैं कि हाजी इकबाल कोई बाहुबली नेता नहीं हैं, और हत्या, अपहरण या डकैती जैसे अपराध से उनका दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है. खनन के विवादों को लेकर वह ज़रूर चर्चा में रहे हैं मगर इसके साथ-साथ अपने खिलाफ हुए केसों को मजबूती के साथ वह कोर्ट में चुनौती दे रहे हैं.

जहाँ सहारनपुर जैसे पिछड़े इलाक़े में ग्लोकल यूनिवर्सिटी जैसी अंतराष्ट्रीय स्तर का शैक्षिक संस्थान खोलने के लिए राज्य सरकार को उन्हें शैक्षिक उत्थान और समाज सेवा के लिए सम्मानित करना चाहिए था वहीं उनके ऊपर ऊपर इस तरह की राजनीतिक घेराबंदी अति निंदनीय है. मगर आज की परिस्थितियों में विरोधियों से ऐसी राजनीतिक बड़प्पन की उम्मीद करना बेमानी है. राजनीतिक पार्टियां अक्सर गैंगस्टर एक्ट को अपने विरोधियों के खिलाफ इस्तेमाल करती रही हैं. प्रदेश भाजपा सरकार ने भी बसपा के वरिष्ठ नेता के साथ भी ऐसा ही किया है. हाजी इकबाल और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ लगा गैंगस्टर एक्ट एक राजनीतिक साजिश है और इसका कठोर विरोध होना चाहिए.

एक गरीब और पिछड़ी-पसमांदा बिरादरी में जन्मे हाजी इकबाल ने बचपन से ही अशिक्षा का दंश झेला है. इन्हीं करने से समृद्धि आने के बाद जहां कुछ लोग होटल या बड़ा व्यापार खोलने की सोचते हैं वहीं उनहोंने छेत्र में एक आधुनिक शैक्षिक संस्थान खोल के अशिक्षा और बेरोजगारी के खिलाफ युद्ध का बिगुल बजा दिया.

आज उनका ट्रस्ट ग्लोकल स्कूल की स्थापना कर के अंग्रेज़ी मीडियम में छेत्र के बच्चों को नर्सरी से इंटर्मीडियट तक की पढ़ाई उपलब्ध करा रहा है. उच्च शिक्षा के लिए 350 एकड़ में फैली ग्लोकल यूनिवरसिटि मेडिकल, विधि, फ़ार्मेसी, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट आदि डिपार्टमेंटों में 50 से ज़्यादा कोर्स चलाती है.

ग्लोकल अस्पताल में सस्ते दरों में क्षेत्र के लोगों का इलाज होता है. ग्लोकल यूनिवर्सिटी जहाँ एक ओर मेरिट और उच्च स्तर की रिसर्च पर समझौता नहीं करती वहीं सामाजिक न्याय और वंचित समाज का भी पूरा खयाल रखती है. तकरीबन 30 प्रतिशत छात्रों की फीस में छूट है और वंचित-बहुजन समाज के छात्र उच्च शिक्षा के छेत्र में कदम रख पा रहे हैं. हाल ही में ग्लोकल यूनिवर्सिटी में डॉ अंबेडकर सेंटर फॉर एक्सक्लूजन स्टडीस एंड ट्रांसफोरमेटिव एक्शन (ACESTA) की नींव रखी गई जिसके तहत फ़ैकल्टि क्षेत्र की गरीबी और पिछड़ेपन पर शोध कर रही है.

आगामी 15 अगस्त 2018 को ‘जोतिबा फुले स्कॉलरशिप’ का ऐलान होना है जिसके तहत सर्वसमाज (सभी समाज – संपादक) के 100 मेधावी परंतु गरीब परिवार के छात्र-छात्राएँ लाभान्वित होंगे. इस स्कीम में फ्री ट्यूशन फीस के साथ-साथ बेहद सस्ता हॉस्टल और खाना शामिल हैं.

यूनिवर्सिटी में एग्रिकल्चर के छेत्र में कई प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है जिस से आने वाले दिनों में क्षेत्र के किसान और फल-पट्टी से जुड़े लोग लाभान्वित होंगे. ग्लोकल यूनिवर्सिटी के कारण क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिला है तथा लोकल मार्केट का विस्तार हुआ है. यूनिवर्सिटी के करीब मिर्ज़ापुर और बादशाहीबाग जैसे कस्बों में छात्रों और फ़ैकल्टि की जरूरतों को पूरी करने के लिए कई नई दुकाने, ढाबे, हॉस्टल इत्यादि खुले हैं एवं ज़मीन के दर बढ़े हैं.

ऐसे में हाजी इकबाल पर लगाया गया गैंगस्टर एक्ट सहारनपुर छेत्र के विकास के लिए बुरी खबर है.

जहां भाजपा सरकार सिर्फ विकास की जुमलेबाज़ी करती है वहीं हाजी इकबाल ने विकास के छेत्र में ठोस काम किया है. जहां उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने उच्च शिक्षा का बजट घटाया है वहीं ग्लोकल यूनिवर्सिटी ने बिना सरकारी मदद के छेत्र के लोगों के लिए शिक्षा और रोजगार का प्रबंध किया है. यूनिवर्सिटी पूरी तरह से आधुनिक और प्रगतिशील है और अपने उपकुलपति प्रोफेसर श्री बंसी लाल रैना की लीडरशिप में आगे बढ़ रही है. ऐसी स्थिति में तमाम नागरिक और सामाजिक संगठनों, सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्ष को समर्पित राजनीतिक पार्टियों और इंसाफपसंद लोगों को इस राजनीतिक नाइंसाफी के खिलाफ खड़ा होना चाहिए.

इस संदर्भ में जहां काँग्रेस और लोक दल से समर्थन की आवाज़ें आना शुरू हुई हैं वहीं पार्टी (बसपा) की खामोशी हैरान करने वाली है. ज्ञात रहे की 23 जुलाई 2018 को जब हाजी इकबाल और परिवार पर गैंगस्टर एक्ट लगा था तब बसपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री आर. एस. कुशवाहा सहारनपुर में ही दो दिवसीय सम्मेलन में शिरकत कर रहे थे. मगर अफसोस की उन्होंने एक शब्द भी अपनी ही पार्टी के एमएलसी के समर्थन में नहीं बोला. साथ ही सुश्री कुमारी बहन मायावती की भी खामोशी दुःखदायी। जब दूसरी पार्टियां समर्थन में उतर रही हों तो अपनी ही पार्टी के नेता के साथ सौतेला (दूसरे दर्जे का) [1] व्यवहार अत्यंत पीड़ादायक है.

अगर राजनीतिक द्वेष के कारण हाजी इकबाल को सरकारी तंत्र घेरेगा तो इस से हर उस व्यक्ति का मनोबल टूटेगा जो विकास के लिए काम करना चाहता है. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी लगातार ‘नामदार’ लोगों की जगह ‘कामदार’ लोगों की वकालत करते रहे हैं. उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने एक गरीब-पसमांदा परिवार में जन्मे ‘कामदार’ व्यक्ति को अतिउत्साह और सत्ता की घमंड में घेर कर एक ऐसा संदेश दिया है जो 2019 में उस के ऊपर भारी पड़ सकता है. हाजी इकबाल पर हमला छेत्र के विकास और शोषित-बहुजनों पर हमला है. भाजपा आत्मनिरीक्षण करे.

प्रस्तुत लेख, लेखक के निजी विचार हैं. वे ग्लोकल यूनिवर्सिटी में समाजशास्त्र के प्रोफेसर हैं और डॉ अंबेडकर सेंटर फॉर एक्सक्लूजन स्टडीस एंड ट्रांसफोरमेटिव एक्शन (ACESTA) के निदेशक हैं. यह लेख उन्होंने संपादक को व्हाटसअप पर 19.07.2018 को भेजा था. [1] द नेशनल प्रेस भेदभाव पूर्व शब्दों के प्रयोग को समर्थन नहीं करता है, इसलिए लेखक द्वारा प्रयोग किये गए शब्द “सौतेला” की जगह “दूसरे दर्जे” का पढ़ा जाए.