पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह (23.12.1902 – 29.05.1987) के जयंती पर किसान प्रकोष्ठ, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी, द्वारा आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने किसानो के समस्याओ को उठाया, साथ ही देश और प्रदेश की राजनीति की भी की. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा/ BJP), और जनता दल यूनाइटेड (जदयू/ JDU) की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया. साथ ही लोक जनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पर भी चुटकी ली.

प्रस्तुत है उनका भाषण (वीडियो लिंक भी इसी पोस्ट में देखें) 

आज हम किसानों के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को याद कर रहें हैं. चौधरी जी किसानों के चौधरी थे. किसान प्रकोष्ठ, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ने उनका जन्मदिन का आयोजन किया है.

आज देश में कोई सबसे ज्यादा परेशान है तो वह है देश का किसान. ऐसा नहीं है कि सिर्फ वही परेशान है लेकिन वह ज्यादा परेशान है. यह परेशानी आज से ही नहीं बहुत दिनों से है. जो किसान पूरे देश को अन्न खिलाता है, वह आज खुद दाने-दाने को परेशान है, खास कर छोटे किसान. पुरे देश की यही स्थिति है. छोटे किसानों की स्थिति लगभग मज़दूर जैसी है.

जैसे एक मज़दूर मेहनत करता है  उससे भी ज्यादा मेहनत किसान करता है. क्योंकि मज़दूर तो खेत में काम करने समय पर आता है और समय पर जाता है. उसे दिन भर की मजदूरी उसे मिलती है. लेकिन किसान का तो कोई समय ही नहीं होता है. वह सुबह चार बजे जागता है और रात दस-ग्यारह बजे तक काम करता है. उसी तरह रोज उसका जीवन चलता है. उसे न बरसात में चैन प्राप्त है, न गर्मी में चैन और न हीं जाड़ा में. किसान हमेशा परेशानी में रहता है. जबकि पूरे देश में किसानों (और इस काम से जुड़े लोगो) की संख्या 70-80% है. इस काम में इतनी बड़ी जनसंख्या लगी है, उसके बावज़ूद किसानों की हालत ख़राब है.

चौधरी चरण सिंह के जयंती पर किसन प्रकोष्ठ, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी द्वारा कार्यक्रम में उपेंद्र कुशवाहा बोलते हुए

देश में शायद ही कोई पार्टी है चाहे सत्ता में रहने वाली पार्टी या सत्ता से बाहर रहने वाली पार्टी हो, चाहे राष्ट्रीय स्तर की पार्टी हो या प्रदेश स्तर की, शायद ही कोई पार्टी होगी जो किसानों की बात नहीं करती होगी. लेकिन किसानों की बात तो सभी करते हैं. लेकिन बात सिर्फ बात तक सीमित होकर रह जाती है. बिहार में जब सरकार बनी, लगभग 15 साल पहले, बड़ी प्रतीक्षा थी लोगो की.

अभी बिहार सरकार के समक्ष पार्टी के किसान प्रकोष्ठ के साथियों ने अपना डिमांड रखा है. जो कोई सरकार में होगा उसी के सामने कोई अपनी बात रखेगा, कोई डिमांड रखेगा. आखिर वो अपनी बात कहाँ रखेगा? डिमांड तो अपने ठीक रखा है, लेकिन पिछले 15 वर्षो में कृषि की क्या स्थिति हुई है? आजतक पूरे बिहार में चाहे सिंचाई का मामला हो या किसानों से संबंधित और कोई मामला.

आज पूरे के पूरे सहा-बाद का इलाके में सिंचाई की सुविधा है, यह सुविधा नहर के कारण है. लेकिन जो नहर की सुविधा है उसे  अंग्रेजी राज ने दिया था. आज़ाद भारत में एक चीज भी नहीं बदला. और बाद में जिनसे आज अपेक्षा है उन्होंने कुछ नहीं किया बल्कि उसमें धीरे-धीरे और कमी आते जा रही है. तो किसी भी मामला में यह सरकार किसानों के हित में काम करने वाली सरकार साबित नहीं हुई.

मांग ठीक है, पार्टी के तरफ से हम इस मांग को पूरा-पूरा समर्थन करते हैं. आपकी सभी माँगे जायज़ हैं.

जब पार्टी की नीव पड़ी थी तभी मैंने गाँधी मैदान में कहा था कि पार्टी का मुख्य नारा होगा – “जय किसान: जय नौजवान.”

यह सिर्फ नारे की बात नहीं है, मौका मिलने पर हम लोग किसानों के हितों के लिए काम काम करेंगें.

आज हमारे मुख्यमंत्री जी कहाँ हैं? हम जिनके समक्ष मांग रख रहें हैं, उनसे कथनी जितनी लेनी हो ले लीजिए, लेकिन करनी का कहाँ सवाल है?

कृषि रोड मैप जारी हुआ. बिहार में बड़ा ढिंढोरा पीटा गया. कहा गया इसमें किसानों के लिए सभी तरह का इंतज़ाम है. बस थोड़े से पैसे का अभाव है. कहा गया पैसा होगा तब हम कृषि रोड मैप को कार्यान्वित करने का काम करेंगें. अब क्या कहिएगा माननीय नीतिश कुमार जी?

अब तो डबल इंजन की सरकार है. अब डबल इंजन की सरकार दिल्ली में और राज्य में . पहले तो आप आसानी से कह देते थे कि, बिहार को स्पेशल स्टेटस दो, बिहार को स्पेशल पैकेज दो, अब क्यों चुप हैं इन बातों के ऊपर?

कृषि रोड मैप के लिए पैसा चाहिए तो स्पेशल पैकेज की माँग कीजिए हम लोग भी आपके साथ इस माँग के साथ खड़े रहेंगें.

आप किसानों के हित में काम कीजिए, हम केंद्र से लेकर राज्य तक हम तमाम मतभेदों को भूलकर हम आपका समर्थन करेंगें. निश्चित रूप से समर्थन करेंगें क्योंकि बिहार के लिए यह यह जरूरी है. पूरे देश की तरह बिहार भी कृषि प्रधान है.

बिहार में जबतक किसानों के समस्या का हल नहीं निकलेगा, तब तक समाज के किसी वर्ग का भला नहीं होगा. समाज के जो दूसरे वर्ग के लोग हैं, उनके घरों में भी खुशहाली जाएगी तो किसानों के खेत-खलिहान और घरों से होकर जाएगी.

बिहार के नौजवान, पेट पालने के लिए दूसरे राज्यों में जाकर अपमानित होते हैं. आखिर क्यों उनको अपमान का शिकार होना पड़ता है?

अगर कृषि और किसानों की हालत ठीक हो जाए तो नौजवानो को भी यहाँ रोज़गार मिल सकता है. नौजवानो के लिए अगर कहीं रोज़गार सृजन का काम हो सकता है तो वह कृषि के क्षेत्र में संभव है. नहीं लेकिन नहीं हो पाया.

मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के कथनी में तो बहुत सरे कृषि रोड मैप है लेकिन करनी में कुछ नहीं.

अपनी राजनीति चमकाने नीतिश कुमार ज़रूर माहिर हैं, भले ही बिहार की जनता का चेहरा चमके या न चमके.

लोग तो हिसाब लेंगे और अब मौका आ रहा है. अब आप डबल इंजन की सरकार चला रहें हैं. आप अब भी अपनी राजनीति चमकाने में लगे हुए हैं.

उन्होंने कहा था कि उनका 56 इंच का सीना है. उस समय वे प्रधानमंत्री के उम्मीदवार थे. हमलोगों को भी लगता था कि वाकई उनका 56 का सीना है. बाकी बातों को रहने दीजिए, कहाँ गया 56 इंच का सीना?

जिस व्यक्ति ने आपकी थाली छीन ली, उनके साथ आप नतमस्तक होकर 50: 50 का बँटवारा कर लिया. नीतिश जी आपने 56 इंच के साइन वालो को आपने नतमस्तक करा लिया, उनसे सीट छीन ली.

कभी थाली छीनी थी, अब आपने सीट छीन ली, लेकिन बिहार के लोग यहीं रहते हैं. आपने उनकी थाली से जो रोटी छीनने का काम किया है, बिहार के बच्चों के हाथ से जो किताब छीनने का काम किया है, बिहार की जनता चुनाव में आपसे हिसाब लेगी. सीट लेने से क्या होगा?

नीतिश जी आपसे ज्यादा तेज तो रामविलास पासवान जी निकले. पहले लोग उनको कहते थे … कौन वैज्ञानिक …. (जनता से आवाज़ आती है, मौसम वैज्ञानिक).

मैं रामविलास पासवान जी के खिलाफ नहीं बोलता हूँ, मैं धन्यवाद देने के लिए उनका नाम ले रहा हूँ. उनके खिलाफ बोलने के लिए नहीं.

मुझे रामविलास पासवान जी के साथ काम करने मौका मिला है. मैं उनका बहुत आदर, सम्मान, सत्कार करता हूँ.

उनमें जो विशेष गुण है, मौसम जानने का … अभी (23.12.2018) दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस हुआ … मौसम को पहचानने में वाकई पासवान जी दक्ष है, उन्होंने साबित किया.

उनको मालूम है, कि लोक सभा से तो जीतकर जाना संभव नहीं था, इसलिए राज्य सभा से सीट सुरक्षित करा आएं. मौसम आपने पहचाना है पासवान जी इस बात के लिए आपका धन्यवाद करता हूँ. बहुत अच्छा आपने किया सीट आपने सुरक्षित करा ली. आसाम से या जहाँ उनकी सरकार है, वहाँ से वे राज्य सभा जायेंगे. राज्य सभा जाने में उनको दिक्कत नहीं होगी. लोक सभा तो पहुँचाना मुश्किल ही है.

और जिन्होंने आधा-आधा किया है, मतलब दोनों तरफ आधा-आधा और बीच में ज़ीरो. तो जनता आपको ज़ीरो थमाने वाली है. समय आने दीजिए चिंता मत कीजिए. समय रहने पर काम नहीं कीजिएगा, डबल इंजन की बात करते रहिएगा, तो सिर्फ बात करने से काम नहीं चलेगा.

देखिए काम कैसे होता है. अभी कुछ दिन पहले, तीन राज्यों में सरकार बदल गई. भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार चली गई और कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार आ गई. यूपीए (UPA/ The United Progressive Alliance/ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) की सरकार आ गई. तीन-तीन राज्यों में. एक दिन पहले हमलोगों ने NDA छोड़ा और दूसरे दिन ऐसा परिणाम आया. आग़ाज़ ऐसा है तो अंजाम कैसा होगा?

पहले राहुल गाँधी बोलते थे कि किसानों का कर्ज माफ़ होगा तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा/ BJP) वाले लोग मज़ाक करते थे.

आप मज़ाक करते रहिए, राहुल गाँधी आगे निकल गए हैं, और निकलते रहेंगें. राहुल गाँधी चुनाव में कह रहें थे कि किसानों का कर्ज माफ़ होगा, और और तीन राज्यों में शपथ ग्रहण के बाद पहला काम जो हुआ वह कि पहले ही बैठक में किसानों का कर्ज माफ़ हुआ.

काम करने वाला, कैसे काम करता है देख लीजिए, और बोलने वाला कृषि रोड मैप, कृषि रोड मैप, कृषि रोड मैप, जपते रहता है.

आदरणीय प्रधान मंत्री जी से मैं कहना चाहता हूँ, कि जब किसानों के बात होती है तो आप क्यों चुप हो जाते?

प्रधानमंत्री जी, आपने कहा था जब जीएसटी (GST/ Goods and Services Tax/ वस्तु और सेवा कर) आएगा तब सरकार का ख़ज़ाना भर जाएगा. अब भरा है कि नहीं आप जानिए.

आपने गाँव के छोटे-मोटे काम करने वालों के लिए ऐसा नियम बना दिया कि उन सबको इनकम टैक्स (आयकर) के दायरे में ला दिया. अच्छी बात है. इनकम (आय) करें टैक्स दें. लेकिन ख़ज़ाना में जो पैसा गया है, उसका कुछ हिस्सा किसानों के कर्ज माफ़ी में दे देते तो क्या बिगड़ जाता? क्या बिगड़ जाता!

आप लोगो को सिर्फ बात करनी है, करना कुछ नहीं है. राहुल गाँधी ने अभी हाल ही में UPA की सरकार में कर के दिखाया है. सिर्फ कथनी नहीं बल्कि करनी भी कर के दिखाने के काम किया है.

अब कांग्रेस पार्टी के बारे में. तब हम लोग कांग्रेस के विरोध में थे, तब हम लोग NDA में थे. मैं केंद्र सरकार में मंत्री था. ऐसा नहीं है कि केवल चुनाव के वक्त ही कांग्रेस ने काम किया. आपको याद होगा उस वक्त … दो-तीन साल पहले भूमि अधिग्रहण का मामला कोर्ट में आया था, … संसद में संशोधन के लिए एक बिल (विधेयक) आ रहा था जिससे किसानों का अहित होने वाला था. कांग्रेस ने राहुल गाँधी के नेतृत्व में आगे बढ़कर सदन के अंदर और सदन के बहार आवाज़ उठाया और उसका नतीजा हुआ कि NDA के उतनी मजबूत (बहुमत की)  सरकार ने भी अपना कदम वापस कर लय. और वह बिल पारित नहीं हो सका.

किसानों के लिए पीछे किसने क्या किया या नहीं किया वह अपने जगह है, लेकिन आगे कौन करेगा वह बिहार प्रदेश की जनता देख रही है.  

आज  दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस हो रही थी, जिसमें अमित शाह जी और बाकी घटक दलों के नेता थे.

अमित शाह जी बिहार में तीनो दलों के गठबंधन की घोषणा कर रहें थे. उन्होंने कहा की सबकुछ देखते हुए तीनों पार्टी – भारतीय जनता पार्टी, जनता दाल यूनाइटेड और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी … इसी बीच रामविलास पासवान जी  से टोकना पड़ा, …. कि RLSP नहीं … LJP, वीडियो में देखिएगा. आप लोग देखिए कि RLSP का कितना डर है उनके मन में. सोते, जागते, उठते, बैठते, सब जगह RLSP का डर सता रहा है, और आगे भी RLSP उनको परेशान करती रहेगी. चुनाव के वक्त पता चलेगा कि RLSP ने कितना भय पैदा किया ही उनके मन में.

और जब जनता साथ में खड़ी है, तो भय में तो उनको रहना ही है.

ज्यादा समय नहीं है किसानों का समय भी आने वाला है. डबल इंजन में से कोई भी इंजन नहीं रहने वाली है. दिल्ली की भी और पटना की भी.

जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आता जाएगा उनका कबाड़ा होता जाएगा और चौधरी चरण सिंह जिस तरह से किसानी का हित

चाहतें थे, उस तरह की सरकार दिल्ली से लेकर प्रदेश तक में आएगी.

निश्चित रूप से यकीन मानिए आगे आने वालो दिनों में ऐसा होगा और इन बातों के लिए RLSP ने कमर कस ली है. RLSP ने संकल्प ले लिया है, कि हम “जय नौजवान: जय किसान” की बात सिर्फ नारों में नहीं करेंगें बल्कि मौका मिलने पर उसको कर के भी दिखा देंगें.

चलिए अच्छा काम किया आपने, चौधरी साहब को याद करने का भी मौका दिया, इतने सारे लोगो से मुलाकात का भी मौका दिया, और फिर किसानों के हित में कुछ बात करने का भी मौका दिया,  किसान प्रकोष्ठ के साथियों ने यह अच्छा काम किया है, इसके लिए मैं आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद करता हूँ, एक बार फिर चौधरी चरण सिंह के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूँ.

नोट: प्रस्तुत भाषण, चौधरी चरण सिंह के जयंती पर किसान प्रकोष्ठ, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी  द्वारा पटना में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा जी ने 23.12.2018 को दिया था. भाषण ज्यों-का-त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेकिन इसे सुपाठ्य और सुग्राह्य बनाने के लिए दोहराव वाले वाक्यों को हटा दिया गया है, साथ ही कुछ वाक्यों का समन्वय किया गया है. ऐसा इसलिए किया गया है कि भाषण देने और उसे टेक्स्ट के रूप में प्रस्तुत  करना दोनों अलग-अलग विधा है. – संपादक

विशेष: द नेशनल प्रेस के संपादक, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं, लेकिन प्रेस को इससे तठस्थ रखने की कोशिश की गई है. स्वास्थ्य लोकतंत्र के लिए द नेशनल प्रेस अपने नियमों के अधीन किसी भी पार्टी के पदाधिकारी का लेख और भाषण प्रकाशित करेगा. लेकिन सीमित संसाधनों के कारण यह तभी होगा जब उसे प्रेस को भेजा जाए. मूल भाषण से ट्रांसक्राइब: अनिल कुमार, संपादक. आप भी लिखें. ईमेल: Press.Editor.Hindi@gmail.com