लोक सभा ने आज (20.12.2018) उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2018 पारित कर दिया. यह कानून उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 का स्थान लेगा जो 32 वर्ष पुराना कानून है. 1986 के बाद से बाजार का स्वरुप, व्यापर का तरीका दोनों पूरी तरह बदल गया है. यह कानून ई-कॉमर्स, ऑनलाइन खरीद-फरोख्त, ऑनलाइन पेमेंट, आदि को संभालने में पूरी तरह सक्षम नहीं थी.

उपभोक्ता संरक्षण विधेयक 2018 के बहस के दौरान लोक सभा में राष्ट्रीय जनता दल के (राजद/ RJD) के जय प्रकाश नारायण यादव (Jay Prakash Narayan Yadav) ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2018 के तहद बनने वाले उपभोक्ता कमीटी में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए प्रतिनिधित्व सुनिश्चित (आरक्षण) की मांग की.

लेकिन उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान बहस के जबाब देने के क्रम में इस प्रश्न पर चुप्पी साध ली. उन्होंने बहस का जबाब देते हुए जय प्रकाश नारायण यादव का नाम लेकर कहा कि उनके सुझाव बहुत अच्छे हैं लेकिन उनके आरक्षण के माँग पर उन्होंने कुछ नहीं कहा, चुप्पी साध ली.

रामविलास पासवान, मंत्री उपभोक्ता मामले, लोक सभा में उपभोक्ता संरक्षण विधेयक 2018 पर हुए बहस का जबाब देते हुए

आरक्षण की लड़ाई लड़ने वाले रामविलास पासवान की लोक सभा में उनके ही मंतालय में आरक्षण के सवाल पर उनकी चुप्पी कई सवाल खड़ा करतें हैं. अन्ना आंदोलन के बाद गठन होने वाले लोकपाल में भी उन्होंने प्रतिनिधित्व (आरक्षण) कि माँग की थी, तब वे सरकार में नहीं थें. आज यह सवाल उनके ही मंत्रालय के बारे में उठा था.

लोक सभा का यह अंतिम सत्र है.

लोक सभा चुनाव सर पर है. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग/ NDA) से राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा/ RLSP) अलग हो चुकी है और अब सबकी निगाहे रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा/ JLP) पर टिकी हुई है.

रामविलास पासवान की छवि प्रतिनिधित्व (आरक्षण) समर्थक रही है.

लेकिन आज वे अपने ही मंत्रालय में आरक्षण के मांग पर लोक सभा में एक मंत्री के रूप में चुप रहतें हैं तो इसपर सवाल उठना स्वाभाविक है.

बहस में भाग लेते हुए ई. टी. मोहम्मद ने सरकार के कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस देश का क्या होगा जब इतिहास पढ़ा सरकार का बैंक चलाता है और नौकरशाह अदालत। इसलिए उपभोक्ता समिति के लोग नौकरशाह नहीं बल्कि कानून के जानकर होने चाहिए. कौशलेन्द्र कुमार ने कहा कि अभी हाल ही में उच्च न्यायलय ने दवाइयों के ऑनलाइन बिक्री पर प्रतिबन्ध लगाया है, इसलिए जरुरी हो जाता है कि उसमें कानून के जानकर लोग भी रहें.

सदस्यों ने इसकी भी मांग की भ्रामक विज्ञापनों पर भी प्रतिबन्ध लगाना चाहिए, यह सीधे-सीधे ठगी है. सदस्यों ने  उदहारण देकर कहा कि गोरापन, गंजापन, बाल काले बाल, कद लम्बा करना, मोटा या पतला होना, जल्दी अमीर बन जाना आदि विज्ञापन बंद होने चाहिए. साथ ह साथ ही विज्ञापन करने वाले लोकप्रिय कलाकारों,  खिलाडियों आदि की भी जिम्मेदारी सुनिश्चित होनी चाहिए.

उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने लोक सभा में यह स्वीकार किया कि उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहद जो उपभोक्ता समिति बनाई गई है वह अदालत नहीं है वह समिति है लेकिन वह अब अदालत जैसा ही कार्य करती है. लेकिन वे उस समिति में प्रतिनिधिकत्व (आरक्षण) के मुद्दे पर चुप रहें.

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