भाजपा सरकार ने अचानक से 7 जनवरी, 2019 को आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण देने का निर्णय लिया जिसे 8 और 9 जनवरी, 2019 को क्रमशः लोक सभा और राज्य सभा में पारित करा लिया। इसे 12 जनवरी, 2019 को राष्ट्रपति ने भी अपनी अनुमति दे दी.

इस निर्णय का शुरू से ही बौद्धिक वर्ग और आंदोलन से जुड़े लोग विरोध कर रहें हैं. हालांकि संसद में All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (AIMIM) के अलावा किसी ने विरोध नहीं किया. लोक सभा में इसके नेता ओवैसी ने इसके खिलाफ भाषण भी दिया.

आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण के विरोध में लोक सभा में दिया गया ओवैसी का पूरा भाषण यहाँ सुनें – 

देश का बौद्धिक वर्ग लगातार इसका इसका विरोध कर रहा है और इसे सवर्ण आरक्षण के रूप में देखा जा रहा है.

इसी क्रम में आज बहुजन साहित्य संघ, जेएनयू, दिल्ली, झारखण्ड जनतांत्रिक महासभा, फातिमा शेख पुस्तकालय ट्रेनिंग एन्ड रिसर्च सेंटर एवं कई अन्य सामाजिक न्याय पसन्द संगठनों, युवा नेताओं, शोध छात्रों , लेखकों, सामाजिक कार्यकर्ता एवम शिक्षकों के साथ मिलकर आर्थिक आधार पर आरक्षण का विरोध जंतर-मंतर पर किया। इसमें बड़े तादात में लोग आएं. लेकिन संसद मार्च करने से पहले दिल्ली पुलिस ने लोगो को रोक दिया.

विरोध प्रदर्शन में शामिल  वक्ताओं ने संविधान के मूल ढाँचे के साथ भाजपा सरकार द्वारा छेड़-छाड़ के खिलाफ अपनी बात रखी गई. लेकिन गुस्सा सभी राजनितिक डालो के खिलाफ था, क्योंकि AIMIM के अलावा सभी राजनीतिक दलों ने इसका समर्थन किया है. सामाजिक न्याय की बात करने वाले राजनीतिक दल बेनकाब हुए हैं.

हाल ही में झारखण्ड में गठित राजनिक दल झारखण्ड जनतांत्रिक महासभा के संस्थाको में से एक बीरेंद्र कुमार, भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल थें.

बीरेंद्र कुमार का कहना था कि भाजपा सरकार देश के शोषित-वंचित समाज के हितो के खिलाफ काम कर रही है. एक तरफ वह संविधान में संशोधन करके इनका हक़ मार रही है तो वहीँ दूसरी तरफ संविधान द्वारा प्रदत अधिकारों को लागु नहीं होने दे रही है. झारखण्ड जनतांत्रिक महासभा का कहना है कि भाजपा सरकार संविधान के अनुसूची 5 और 6 को जानबूझकर लागु नहीं कर रही है. वे इसके लिए आंदोलनरत हैं.

Protest Against 10% Reservation on Economic Ground in Delhi

फातिमा शेख पुस्तकालय ट्रेनिंग एन्ड रिसर्च सेंटर के ज़ुलैख़ा जबीं  ने कहा कि देश में नफ़रत की राजनीति करना और वंचितों का हक़ छीनना भाजपा का मूल चरित्र है. वह सिर्फ ब्राह्मणो और सवर्णो के हिट की बात करती है, और आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण का प्रावधान उसी का नतीजा है.

बहुजन साहित्य संघ के कनकतला यादव ने कहा कि देश के निर्वाचित सदस्यों ने संविधान के मूल भावना को ध्यान नहीं रखा.

बहुजन साहित्य संघ के बाल गंगाधर बागी ने कहा कि बहुजन समाज इसे समाप्त करते तक और सभी समाजो को उसके संख्या के अनुपर में प्रतिनिधित्व देने तक संघर्ष करता रहेगा.

क्ताओं  जोर दिया कि भारतीय समाज में शोषण का मुख्य आधार सामाजिक पहचान है आर्थिक नहीं, साथ ही आरक्षण प्रतिनिधित्व का सवाल है गरीबी उन्मूलन का नहीं तो फिर ऐसा कानून क्यों? इसे ब्राह्मण-सवर्ण आरक्षण के रूप में चिन्हित करते हुए लोगो ने कहा कि जब पहले से ही ब्राह्मण-सवर्ण समाज का देश के संसाधनों पर कब्ज़ा है तो अलग से आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण देने का संवैधानिक, राजनीतिक और नैतिक आधार क्या है?

Protest Against 10% Reservation on Economic Ground, New Delhi

आज के विरोध प्रदर्शन में सरकार द्वारा दलित मुसलमानों एवं दलित ईसाइयों को आरक्षण से बहिस्कृत करने और उच्च जाति के आरक्षण में सभी धर्म के सवर्णों को रखने के दोहरी जातिवादी मानसिकता का भी विरोध किया गया। जातिगत जनगणना, मंडल कमीशन की अनुशंसायें लागू होना, सारी बैकलॉग की सीटों को भरा जाना और अन्य तमाम सामाजिक न्याय के मुद्दों पर बातें आज के विरोध में सरकार के समक्ष रखी गईं। आज का जंतर-मंतर पर प्रतिरोध आर्थिक आधार पर सवर्ण आरक्षण के बहाने सामाजिक न्याय एवं संविधान पर हमले के खिलाफ तीन दिवसीय प्रतिरोध देशव्यापी प्रतिरोध का हिस्सा था।

देश में इस नए कानून के खिलाफ विरोध तेज हो रहा है. यह विरोध इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब राजनीतिक दलों को तय करना होगा कि वे अपने मतदाता के साथ हैं या नहीं? उन्हें मतदाताओं के सामने यह भी स्पस्ट करना होगा कि उन्होंने इस विधेयक का समर्थन कयों किया?