सबसे पहले इलाहबाद हाई कोर्ट ने 200 पॉइंट रोस्टर (आरक्षण चार्ट) ख़त्म कर 13 रोस्टर लागु करने का आदेश दिया. इसके खिलाफ दायर SLP में सुप्रीम कोर्ट ने अपने 21 जनवरी, 2019 के निर्णय में इलाहबाद हाई कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा.

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय प्रभावी रूप से आरक्षण ख़त्म करने वाला निर्णय है. इसके खिलाफ 24 जनवरी 2019 को देश के 11 यूनिवर्सिटीयों में प्रदर्शन हुआ. BHU में इसका नेतृत्व “अनुसूचित जाति/ जनजाति छात्र कार्यक्रम आयोजन समिति”, BHU और “OBC, SC, ST, MT संघर्ष समिति”, BHU ने किया। उन्होंने “200 प्वाइंट रोस्टर का अध्यादेश पारित करो: वर्ना कुर्सी खाली करो”
नारे के साथ भाजपा का पूतना दहन किया.  उन्होंने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि –

उच्च शिक्षा का चरित्र मूलतः जातिवादी है। इसे कई स्तरों पर समावेशी व सामाजिक न्याय परक होना था, जो कभी हुई ही नहीं. देश के वंचितों-शोषितों की बहुसंख्यक आबादी अव्वल तो उच्च शिक्षा तक कभी पहुँच ही नहीं पाई। अव्वल तो ये कि इंदिरा साहनी केस, सब्बरवाल केस, वी. नागराज केस जैसे न्यायिक संघर्षों की एक लम्बी लड़ाई के बाद उच्च शिक्षा जैसे सत्ता-प्रतिष्ठानों में आरक्षण लागू होने में ही पाँच दशक बीत गए.

आज़ादी के पचास साल तक इन शिक्षण संस्थानों पर जन्मजात मेरिटधारी सवर्ण जातियों का ही कब्जा रहा. आरक्षण की ज़रूरत ऐसे ही अमानवीय और अन्यायप्रिय लोगों के कारण पड़ी। तब 1997 में SC-ST आरक्षण और 2007 में जाकर OBC आरक्षण उच्च शिक्षा में लागू किया गया। तब से दो स्तर पर साज़िशें हुईं- पहला ये कि उच्च शिक्षा में निजीकरण किया जाने लगा और दूसरा ये कि स्थाई नियुक्तियों की प्रक्रिया में कमोबेश विराम सा लगा दिया गया।

सामाजिक प्रतिनिधित्व में 1931 की जाति-जनगणना के आंकड़ों की बुनियाद पर SC 15%, ST 7.5%, OBC 52% आबादी का विभाजन कुछ इस प्रकार है, जो आज कम से कम 85% आबादी को कवर करता है.

उच्च शिक्षा में हिस्सेदारी

अब इनके उच्च शिक्षा में हिस्सेदारी का आज 2018 का आंकड़ा कमोबेश कुछ इस प्रकार हैं कि –
15% आबादी वाले SC 7%
7.5% आबादी वाले ST 2.12%
54% आबादी वाले OBC 5%
15% आबादी वाले सवर्ण 85%

रोस्टर क्या है?

आरक्षण लागू होने के बाद पदों के क्रम-विभाजन को ही ‘रोस्टर’ कहा गया. अब पहली बार रोस्टर ऐसा बना, जिससे कुछ सीटें 85% आबादी वाले आरक्षित वर्ग को मिलीं. इसका वितरण को समझें. माना कि कुल पदों की संख्या 100 है.

अब रोस्टर का विभाजन इस प्रकार होगा-
ST का आरक्षण 7.5% है. 100/7.5=13.33 यानी हर 14वाँ पद ST को आरक्षित होगा.
SC का आरक्षण 15% है. 100/15=6.66 यानी हर 7वाँ पद SC को आरक्षित होगा.
OBC का आरक्षण 27% है. 100/27=3.70 यानी हर चौथा पद OBC को आरक्षित होगा.

ताजा मामला क्या है?

ताज़ा मामला ‘असंवैधानिक’ विभागवार रोस्टर प्रणाली के लागू किये जाने का है. प्रावधान यह रहा कि विश्वविद्यालय/कॉलेज को एक इकाई मानकर पदों के सृजित होने की तिथि के बढ़ते क्रम से रोस्टर को फिक्स्स किया जाएगा.

लेकिन बीएचयू के एक शोधछात्र की पहल पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की एकल बेंच ने एक फैसला सुनाया कि विश्वविद्यालय/कॉलेज वार रोस्टर प्रणाली लागू होगी, जिसे 13 प्वाइंट रोस्टर भी कहा जाता है.

यह है उच्च शिक्षा का मूल चरित्र. इसकी एक एक परत और उघाड़ते चलेंगे तो और भी बदबू मिलेगी, और भी सडांध दिखेगी. अब मनुवादी सरकार ने न्यायालयों के सहारे विभागवार रोस्टर लागू करके बची खुची सम्भावनाओं को हमेशा के लिए दफ़न कर दिया है।

24 जनवरी 2019 को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय पर आयोजित आक्रोश सभा को BHU के बहुजन साथियों पुरजोर समर्थन दिया। प्रतिनिधित्व विरोधी भाजपा सरकार का पुतला दहन की प्रक्रिया में पुलिस और छात्रों के मध्य लंबा संघर्ष चलता रहा। बाद में आक्रोशित छात्रों के द्वारा मोदी सरकार के प्रतिनित्व विरोधी आदेशों को दहन किया गया।

OBC,SC,ST,MT संघर्ष समिति BHU के अध्यक्ष रवींद्र प्रकाश भारतीय ने कहा कि सत्ता पक्ष की मानसिकता भाजपा के उन मनुवादी पुतलों को बचाने की थी जिसका बहुजन छात्र पहले ही अपने अन्तर्मन में दहन कर चुके है। भाजपा सरकार ने वादा किया था कि वे 200 पॉइंट रोस्टर पर अध्यादेश लाएंगे परन्तु उन्होंने धोखा किया।

छात्रों को मिला शिक्षकों का साथ

सभा विभिन्न छात्रों ने सम्बोधित किया, जिसे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की शिक्षिका डॉ शोभना नार्लीकर ने भी समर्थन देते हुए मनुवादी सरकार के खिलाफ छात्रों से कड़े संघर्ष का आह्वान किया।