क्या आपने कभी पूछा है कि सामाजिक न्याय का दिया सिर्फ चिराग पासवान ही क्यों जला सकता है? आप और हम क्यों नहीं चिराग और चिरागिन बन सकते हैं? अखिलेश यादव ही क्यों मुख्यमंत्री या समाजवादी पार्टी का अध्यक्ष बनेगा? क्यों नहीं कोई और अहीर/ प्रजापति/ निषाद/ पसमन्दा/ ओबीसी महिला बन जाता है? तेजस्वी में ही क्या बात है कि सामाजिक न्याय का तेज उसी से निखरेगा? अनुप्रिया पटेल में ऐसी क्या प्रिय बात है? क्यों नहीं बिना किसी विरासत के कोई और ओबीसी/पसमन्दा महिला संसद चली जाती है? डिंपल यादव में कौन सा सामाजिक न्याय कूट-कूट कर भरा हुआ है जिससे उत्तर-प्रदेश की तमाम ओबीसी-पसमन्दा महिलाएं वंचित हैं? क्यों नहीं मेरे आपके घर की यादव बहु-बेटी जो सामाजिक न्याय की समझ रखती हो उसे समाजवादी पार्टी संसद भेज देती है? राहुल गांधी को तो पूछिये ही मत, वो इस लोकतन्त्र (राजतन्त्र समझा जाय) के सम्राट हैं।

आप आज ही लिस्ट निकालिये कि पार्लियामेंट में इस देश की जनता ने किसको चुन कर भेजा है। आप पाएंगे कि हर एक सांसद चाहे हो महिला हो या पुरुष किसी न किसी की विरासत लेकर आया है। कोई किसी का पतोह/बहु है तो कोई बेटा है, कोई दामाद है, कोई दूर का रिश्तेदार, कोई दादा/परदादा, कोई मम्मी, कोई ननद, कोई जेठान, कोई साला, कोई पोता है, इसी टाइप के लोगों की फौज हमने संसद में चुन कर भेज दी है (कुछ अपवाद हैं, जो खुद संघर्ष करके आये हैं).

अब आप सोचिए कि इन दुधमूहों को आरक्षण पर कैसे स्टैंड रखने आएगा? जो खुद किसी और के दम पर स्टैंड हुआ है वो क्या हमारे मुद्दों पर स्टैंड लेगा? आज संसद के दोनों सदनों में आरक्षण की हत्या इन्ही सामाजिक न्याय के मसीहाओं की औलादों ने की है और हम लोग आज भी इनसे सवाल नहीं पूछ रहे हैं। मैं तो ये कह रही हूँ कि हम इनसे सवाल पूछे भी क्यों, हम क्यों नहीं इन्हें खारिज़ कर देते हैं? क्या मुझमें और आपमें चुनाव लड़ने की योग्यता, काबिलियत, सामाजिक न्याय की समझ, शैक्षणिक योग्यता नहीं है? क्या हम और आप युवा नहीं हैं?

इस देश की युवा राजनीति के मिथक पर करारा प्रहार करते हुए  Dharmaraj Kumar ने साधारण शब्दों में एक दिन सवाल उठाया था कि, ” अखिलेश की जवानी, जवानी है, और हमारी जवानी पानी है? (अखिलेश की जगह किसी भी राजकुमार/ राजकुमारी का नाम रख लीजिए)। इस कथन से स्पष्ट जाहिर है कि हम लोगों का “युवा नेता/ नेत्री का आईडिया पोलिटिकली इतना खोखला, संकीर्ण और सीमित है कि हमेशा हमें युवा के नाम पर किसी नेता/ उद्दोगपति टाइप लोगों के लड़के लड़कियाँ ही दिखते हैं। क्या आपने कभी सुना है कि एक आम लड़का या लड़की इस देश के सबसे बड़े युवा के तौर पर जाना जाता है? कभी नहीं सुना है। हमारा समाजीकरण ही ऐसे हो गया है किसी नेता के यहां लड़का/लड़की पैदा हुआ और हमने अपना प्रधान से लेकर सांसद उसे ही मान लिया।

धर्मराज जी की इस बात को गौर कीजियेगा और ये क्लियर रखिये की ‘युवा’ इस देश में करोड़ों लोग हैं और उन करोड़ों लोगों की जवानी पानी नहीं है। लेकिन जब जवानी और युवा काउंट होता है तो सिर्फ विरासत वाले युवा काउंट होते हैं.


अगर हम और आप इन औलादों की चमचागिरी करेंगे तो संविधान को नष्ट होना तय है। आज हमारा आपका चुप रहना और गलत आदमी को संसद भेजना ही आरक्षण की हत्या करवाया है। हम सभी ने इन दलालों को संसद भेज कर आरक्षण की हत्या में योगदान दिया है। गलती सुधारने के लिए ही सही, पूरे देश में इन गद्दारों का पुतला दहन होना चाहिए। सामाजिक न्याय के नाम पर परिवारवाद और फेवरिज़्म करने वालों को ऐसे ही नहीं छोड़ देना है। जनता का अपमान हुआ है, हमारे मैंडेट का अपमान हुआ है और सबसे बड़ी हत्या आज संविधान की हुई है, जो इन दलालों ने की है। अंत में फिर धर्मराज जी की बात याद रखिये कि, “ये समय आत्ममंथन का है”। मुझे उम्मीद है हम सभी आत्ममंथन करेंगे।