नितीश कुमार – सुशील मोदी इस छाया चित्र की तरफ गौर कीजिए. ये हैं पिछड़े समाज से आनेवाले बिहार के चर्चित लोहियावादी बुद्धिजीवी और तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के वर्तमान डीन ऑफ़ स्टूडेंट्स वेलफेयर (डीएसडब्ल्यू) डॉ. योगेंद्र महतो.

आज विश्वविद्यालय कार्यालय में आपके शागिर्द भगवा गुंडावाहिनी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (ABVP) के गुंडों ने डॉ. योगेंद्र महतो के साथ हाथापाई और दुर्व्यवहार किया है.

डॉ. योगेंद्र महतो को ABVP के इस फासिस्ट कुकृत्य के खिलाफ अपने ही कार्यालय में धरना पर बैठना पड़ा. हम जानते हैं कि फिर भी आपको शर्म नहीं आयेगी.

नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद देशभर के विश्वविद्यालयों में भगवा गुंडों का उत्पाद बढ़ गया है. दलित, पिछड़े, और आदिवासी निशाने पर हैं लेकिन नीतीश कुमार – सुशील मोदी याद रखिये यह बिहार है. 1974 के आंदोलन की धरती है, सामाजिक न्याय के संघर्ष की धरती है. कुर्सी प्रेम में आप भले ही अंधे और गद्दार हो जाएं लेकिन बिहार के छात्र-नौजवानों को अपनी विरासत याद है.

हम तिलकामांझी की धरती पर कर्पूरी ठाकुर और शहीद जगदेव का परचम झुकने नहीं देंगे. समय है डॉ. योगेंद्र महतो पर हमला करनेवाले भगवा गुंडों को अविलंब जेल में डालिये. अन्यथा बहुजन छात्र-नौजवान इन गुंडों पर लगाम लगाने के लिए आगे बढ़ेंगे.


तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के वर्तमान डीन ऑफ़ स्टूडेंट्स वेलफेयर (डीएसडब्ल्यू) डॉ. योगेंद्र महतो को अपने ही ऑफिस के सामने धरना देना पड़ा

हम भागलपुर के तमाम् न्याय व लोकतंत्र पसंद नागरिकों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, संस्कृतिकर्मियों और भाजपा विरोधी राजनीतिक पार्टियों से अपील करते हैं कि वे भगवा गुंडागर्दी के खिलाफ खड़ा हों.

यह लड़ाई मनुवाद बनाम सामाजिक न्याय की है. अपना पक्ष तय कीजिए- सोनम कुमार