टिप्पणी

मंडल राज-2 की महाराज लालू-घोषणा के बाद युवराज तेजस्वी के लिए चालीसा लिखने के लाइन में इस बार जेएनयू-डीयू के स्कॉलर्स व टीचर्स हैं!

लालू चालीसा लिखने वाले के बारे में तो बहुत नहीं जानता!

लेकिन,तेजस्वी चालीसा जेएनयू-डीयू जैसे बौद्धिक केन्द्र में लिखा जा रहा है. यह मंडल राज-2 के लिए घोषणापत्र निर्माण जैसा ही है. और तेजस्वी के लिए लालू से बड़ी उपलब्धि है!

किसी राजनेता विशेष के लिए चालीसा रचकर और पीछे खड़ाकर होकर ताल पीटने से मनुवादी हमले का मुकाबला नहीं हो सकता है, सामाजिक न्याय की लड़ाई आगे नहीं बढ़ सकती है!

बहुजन नायकों के विचार व विरासत और सामाजिक न्याय की लड़ाई के स्पिरिट से चालीसा रचने और ताली बजाने का रिश्ता नहीं बनता है. उलट, यह मनुवादी संस्कृति व व्यवहार ही है.

इस व्यवहार के पीछे सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्धता कम,निजी उपलब्धि-महात्वाकांक्षा के लिए चाटुकारिता का पहलू ज्यादा मजबूत दीखता है.

रिंकू यादव, भागलपुर, बिहार (ईमेल से प्राप्त)