भागलपुर, बिहार में 2 मार्च 2019 को सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार, बिहार फुले-अंबेडकर युवा मंच, राष्ट्रीय प्रगति पार्टी और राष्ट्र सेवा दल ने साझा प्रेस कांफ्रेंस किया. और 5 मार्च, 2019 को बहुजनो का दिन की घोषण की.

सवर्णों को आरक्षण देने व विश्वविद्यालयों में शिक्षक नियुक्ति में विभागवार 13 प्वाइंट आरक्षण रोस्टर के जरिए दलित, आदिवासी, पिछड़ों का आरक्षण खत्म करने और जंगल-जमीन से आदिवासियों के बेदखली के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ विभिन्न संगठनों के आह्वान पर देश भर में बहुजन 5 मार्च, 2019 को सड़कों पर उतरेंगे.

भागलपुर में भी सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार; बिहार फूले-अंबेडकर युवा मंच, राष्ट्रीय प्रगति पार्टी व राष्ट्र सेवा दल सहित कई संगठन 5 मार्च, 2019 को सड़क पर उतरेंगे.

5 March 2019 Bharat Band | 5 मार्च 2019 भारत बंद

5 मार्च, 2019 के आंदोलन के मुद्दे पर संवाददाताओं से बातचीत में सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार के कोर कमिटी सदस्य रिंकु यादव और बिहार फुले-अंबेडकर युवा मंच के दीपक प्रभाकर ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार में बहुजनों की चौतरफा बेदखली का अभियान चरम पर है. सवर्णों को आरक्षण देने और विश्वविद्यालय में शिक्षक नियुक्ति में बहुजनों का आरक्षण खत्म करने के जरिए शासन-सत्ता की संस्थाओं व उच्च शिक्षा से बहुजनों को बेदखल ही किया जा रहा है. इसे कतई बहुजन समाज बर्दाश्त नहीं कर सकता है.

सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार के रामानंद पासवान और अंजनी विशू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लगभग 20 लाख आदिवासी जंगल-जमीन से बेदखल होंगे. केन्द्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के इस सामाजिक न्याय विरोधीक् फैसले के खिलाफ अविलंब अध्यादेश लाए.

संवाददाताओं से बातचीत में मिथिलेश विश्वास और सोनम कुमार ने कहा कि सवर्ण आरक्षण को आनन-फानन व कम समय में लागू करनेवाली केन्द्र सरकार विभागवार 13 प्वाइंट रोस्टर के खिलाफ विश्वविद्यालय को इकाई मानते हुए 200 प्वाइंट आरक्षण रोस्टर के पक्ष में अध्यादेश लाने से भाग रही है. बहुजन समाज एकलव्य का अंगूठा काटने की इस साजिश को बर्दाश्त नहीं करेगा.

सामाजिक न्याय आंदोलन के सौरव राणा व राष्ट्रीय प्रगति पार्टी के नीरज कुमार ने कहा कि 5 मार्च, 2019 को अतिपिछड़ों-पिछड़ों का संख्यानुपात में आरक्षण बढ़ाने व आरक्षण की सीमा 50% से बढ़ाकर 69% करने, न्यायपालिका व निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू करने, जाति जनगणना करने, दलितों-अल्पसंख्यकों-महिलाओं पर बढ़ते जुल्म-हिंसा पर रोक लगाने व त्वरित न्याय देने, मॉब लिचिंग रोकने और 2 अप्रैल 2018 भारत बंद में आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे की वापसी व रासुका के तहत जेल में बंद दलित-आंदोलनकारियों को रिहा करने की मांगों के पक्ष में भी आवाज बुलंद होगी.

संवाददाता सम्मेलन में वीरेंद्र गौतम, आलोक, लालू यादव सहित कई आंदोलनकारी मौजूद थें.

इस प्रेस कांफ्रेंस रिपोर्ट को द नेशनल प्रेस तक पहुंचाया सोनम कुमार ने पहुंचाया है.