लोक सभा में सामाजिक न्याय के विभिन्न बिंदुओं पर पिछले दो – तीन सालों में जिस नेता ने सामाजिक न्याय के लिए मजबूत आवाज़ उठायी है, धर्मेद्र यादव उनमे से प्रमुख हैं. ये वर्तमान में बदायूं से सांसद हैं. 2004 में ये पहली बार मैनपुरी लोक सभा सीट से जीते थे. उसके बाद 2009 और 2014 में बदायूं से चुने गए हैं. ये लगातर तीसरे बार सांसद बनें हैं. इनकी गिनती समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेताओ में शुमार की जाती है. इसका एक कारण यह भी है कि ये मुलायम सिंह यादव – अखिलेश यादव परिवार से आतें हैं. मुलायम सिंह यादव के सगे भतीजे हैं.

दो-तीन सालों में इन्होने लोक सभा में बहस हो या प्रश्नकाल, हर जगह सामाजिक न्याय और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, और अन्य पिछड़ा वर्ग (SC, ST, OBC) के मुद्दे उन्होंने इसे जोरदार तरीके से उठाया है.

सम्पादकीय टिपण्णी: यह सही है कि धर्मेंद्र यादव ने लोक सभा में कई सवाल उठायें हैं लेकिन, लेकिन साथ ही यह भी सही है कि समाजवादी पार्टी ने अपने कार्यकाल में सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व के लिए ईमानदारी से काम नहीं किया। अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़े वर्गों के सभी जातियों के प्रतिनिधित्व में रोड़े अटकाएं। धर्मेंद्र यादव मुलायम परिवार से आतें हैं और इस परिवार ने किसी अन्य को नेता बनने से रोकने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

कहने को तो भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (भाजपा – आरएसएस) का विरोध कई पार्टियाँ करती हैं, किन्तु उनके और धर्मेद्र यादव विरोध में अंतर है. धर्मेद्र यादव दलितों – पिछडो और अल्पसंख्यको के पक्ष में जोरदार तरीके से बोलते हैं. इन समुदायों से सम्बंधित शायद ही कोई ऐसा मुद्दा हो, जिस पर ये बेबाक तरीके से नहीं बोलते हों. (नोट: लेखक ने अनुसूचित जाति समुदाय के लिए दलित शब्द का प्रयोग किया है, लेकिन द नेशनल प्रेस अनुसूचित जाति शब्द के प्रयोग पर जोर देती है.)

दलित, पिछड़ा, और अल्पसंख्यक समाज अर्थात बहुजन समाज के कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर लोक सभा में धर्मेद्र यादव ने बड़े मजबूती से अपनी माँगे रखी. ये मुद्दे हैं – जाति जनगणना, रिजर्वेशन, सभी समुदायों की भागीदारी, 13 पॉइंट रिजर्वेशन रोस्टर, अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निरोधी) कानून 1989, (इस कानून को अधिकतर लोग “एससी-एसटी एक्ट” के नाम से जानतें हैं), आदि.

जातिगत जनगणना के बारे में इनका कहना है कि सरकार भाजपा की हो या कांग्रेस की- इनमे से किसी सरकार ने अन्य पिछड़ा (ओबीसी/ OBC) की जातिगत जनगणना में कोई रूचि नहीं दिखाई है. कांग्रेस सरकार ने 2011 में OBC की जातिगत जनगणना कराई, इसके लिए 5000 करोड़ रूपये भी खर्च हुए, किन्तु वह आकड़े अभी तक जारी नहीं किये गए. उनके अनुसार इसका कारण यह है कि यदि OBC के जातिगत आकड़े जारी हुए, तो फिर OBC लोग अपनी आबादी के हिसाब से देश के संसाधनों पर अपना हक मांगेगे. OBC के लोग अपनी आबादी के हिसाब से देश के संसाधनों पर अपना हक नहीं माँगें, इसलिए सरकार ने जातिगत जनगणना तक जारी नहीं किये. नरेंद्र मोदी सरकार ने भी इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई.  

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार चाहे तो जातिगत जनगणना दो महीने में हो सकती है. उनकेअनुसार इस देश में OBC की आबादी 64 % है , जबकि सरकार केवल 55 % ही मानती है.

इनका कहना है कि पिछड़े वर्गो के रिजर्वेशन के लिए काका कालेलकर (गठित: 29.01.1953, रिपोर्ट जमा: 30.03.1955, रिपोर्ट ख़ारिज: 1961- संपादक) ने सिफारिश की थी. किन्तु उसे लागू ही नहीं किया गया. जब जनता पार्टी की सरकार बनी तो पिछड़े वर्गो के रिजर्वेशन के लिए मंडल आयोग  (गठित: 01.01.1979, रिपोर्ट जमा:1983, रिपोर्ट स्वीकृत:07.08.1990, रिपोर्ट लागू:1992- संपादक) को गठित किया गया. ऐसा इसलिए हुआ क्योकि उस सरकार समाजवादी – लोहियावादी की अहम भूमिका था. 1990 में जब जनता दल की सरकार बनी तो मंडल आयोग की सिफारिशें लागू हुयी. जिसके तहत पिछड़े वर्गो को सरकारी नौकरियों में 27% रिजर्वेशन मिला. ऐसा जनता दल की सरकार में ही हो सका. याद रहे कि जनता दल की सरकार में समाजवादी – लोहियावादी की मुख्य भूमिका थी. किन्तु भाजपा को यह पसंद नहीं आया कि पिछड़े वर्ग के लोगो को हक मिले. इसलिए भाजपा ने जनता दल की सरकार गिरा दी.

मंडल कमीशन की मूल रिपोर्ट यहाँ पढ़ें:
http://www.ncbc.nic.in/Writereaddata/Mandal%20Commission%20Report%20of%20the%201st%20Part%20English635228715105764974.pdf

आज मंडल आयोग को लागू हुए २8 साल हो चुके हैं. किन्तु दुर्भाग्य की बात है कि अभी भी सरकारी नौकरियों में पिछड़े वर्गो की भागीदारी केवल 9% है.

उनका कहना है कि भारत जातियों में बटा हुआ देश है, इसलिए रिजर्वेशन की पुराणी व्यवस्था खत्म होनी चाहिए. और जिस जाति की जितनी आबादी है, उस जाति को उसकी आबादी के अनुपात में रिजर्वेशन होना चाहिए. रिजर्वेशन पूरा 100% होना चाहिए. उन्होंने कहा कि SC ST OBC के लोग किसी से कुछ छीन नहीं रहे, ये केवल अपना हक मांग रहे हैं.

उनका  कहना है कि OBC के रिजर्वेशन में क्रीमी लेयर का प्रावधान है. अब पिछड़े वर्गो का अनुपात बढ़ाना है तो यह क्रीमी लेयर खत्म की जाये या फिर यह नियम बनाया जाये कि यदि पिछड़े वर्ग का 27%  कोटा नहीं भरा गया है तो खाली सीटे OBC की क्रीमी लेयर से भरा जाए. OBC की सीटों को खाली नहीं रहना चाहिए. जब तक 27% कोटा पूरा नहीं होता, पिछडो को अतिरिक्त मौका दिया जाये.

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार दलितों-पिछडो को हक मार रही है, उनका दमन कर रही है. मोदी सरकार ने बाबा साहेब आंबेडकर के बने संविधान की जीतनी धज्जिया उड़ाई हैं, उतनी कभी नहीं उडी. हर संवैधानिक संस्था खतरे में हैं. इस सरकार में एक भी ऐसी संस्था नहीं बची जिसका संवैधानिक अतिक्रमण नहीं हुआ हो.  न्यायलय के न्यायाधीश मिडिया में आकर गुहार लगाते हैं कि न्यापालिका में लोकतंत्र नहीं है. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (Central Bureau of Investigation CBI/ सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directors (ED) or Directorate General of Economic Enforcement) मोदी सरकार की पार्टनर का रोल कर रही हैं.

(अधिक जानकारी लिंक – केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो/ सीबीआई Central Bureau of Investigation /CBI   और प्रवर्तन निदेशालय/ ईडी Enforcement Directorate )

पिछले साल जब SC ST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत का प्रावधान किया था, तब इस संबंध में उनका कहना था कि यह सच है कि कुछ झूठे मुकदमे दर्ज होते हैं, लेकिन यह भी सच है कि जातिगत उत्पीड़न करने वालो सज़ा नहीं मिलती है. समाज के दबदबा के कारण वे बच निकलते हैं. उन्होंने कहा कि जब तक SC ST OBC को सहयोग सम्मान नहीं मिलेगा, राष्ट्र का निर्माण नहीं हो सकता है. समर्थ और सशक्त भारत के लिए यह जरूरी है कि इनको सहयोग और सम्मान मिले.

कॉपी SC ST Act की मूल कॉपी यहाँ पड़ें
http://ncsk.nic.in/sites/default/files/PoA%20Act%20as%20amended-Nov2017.pdf

उन्होंने कहा कि देश के शीर्ष नेतृत्व में जहाँ नीतियां बनती हैं, दलित, पिछड़े, और अल्पसंख्यक न के बराबर हैं. गवर्नर, केंद्रीय सचिवालय, न्यायपालिका में ये समुदाय न के बराबर हैं. नरेंद्र मोदी  सरकार की केबिनेट में केवल 4 OBC मंत्री हैं जबकि मोदी सरकार के अनुसार भी इनकी आबादी 55% है. देश में विश्वविद्यालयों में इन समुदायों का बुरा हाल है. 2371 प्रोफेसर में से केवल 1 OBC है, 4708 एसोसिएट प्रोफेसर में से केवल 6 OBC हैं, 9721 असिस्टेंट प्रोफेसर में से केवल 1745 OBC हैं. पिछडो का हक 27% है, ये हक़ उन्हने कब मिलेगा? अगर नहीं मिला तो सड़को पर संघर्ष होगा.

पिछली साल जब 5 मार्च, 2018 को यूनिवर्सिटी अनुदान आयोग (University Grant Commission/ यूजीसी/ UGC) ने 200 पॉइंट रिजर्वेशन रोस्टर ख़त्म कर 13 पॉइंट रिजर्वेशन रोस्टर लागू किया था, तभी से धर्मेंद्र यादव ने 13 पॉइंट रिजर्वेशन रोस्टर खत्म कराने के लिए लोक सभा के भीतर और बाहर भी संघर्ष किया.

इन्होने कहा कि यदि 13 पॉइंट रिजर्वेशन रोस्टर लागू हो गया तो 200 साल तक SC ST OBC के प्रोफेसर नहीं बन पाएंगे. यदि ऐसा हुआ तो बहुत बुरा होगा. उन्होंने कहा कि यदि रोस्टर ही लागू करना हो, तो इसको उल्ट कर लागू किया जाना चाहिए. जिसके तहत पहली सीट ST को, दूसरी SC , तीसरी OBC को, चौथी, पांचवी और छठी सामान्य वर्ग को मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि जो समुदाय ज्यादा कमजोर है, उसका पहले ध्यान रखा जाना चाहिए.

13 पॉइंट रिजर्वेशन रोस्टर के विरुद्ध, आदिवासी मुद्दों तथा अन्य जन विरोधी नीतियों को लेकर इस महीने  5 मार्च, 2019 को जब भारत बंद किया गया था, उन्होंने इस बंद का जोरदार ढंग से समर्थन किया.

13 पॉइंट रिजर्वेशन रोस्टर के खिलाफ पुरे देश में विभिन्न संगठनो ने विरोध किया, आम जनता ने भी इसमें भाग लिया, इसी का परिणाम है कि मोदी सरकार को 13 पॉइंट रिजर्वेशन रोस्टर के खिलाफ अध्यादेश लाना पड़ा.

उन्होंने कहा कि इस देश में 1% लोगो के पास 73% सम्पत्ति है, जबकि 99% लोगों के पास केवल 27% सम्पत्ति है.

ऑक्सफेम की मूल रिपोर्ट जिसमें कहा गया है कि 1% लोग संसाधनों पर कब्ज़ा जमाये हुए हैं-  https://www.oxfam.org/sites/www.oxfam.org/files/file_attachments/bp210-economy-one-percent-tax-havens-180116-en_0.pdf

सम्पत्ति का यह असमान वितरण जल्दी ही दूर करना होगा. दलित उत्पीड़न और मुस्लिम समुदाय की सुरक्षा के लिए भी उन्होंने आवाज़ उठायी है. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की भेदभावकारी नीतियों के चलते हैदराबाद विश्वविधालय के छात्र रोहित वेमुला को आत्महत्या करनी पड़ी थी.

गुजरात में ऊना कांड हुआ. उन्होंने कहा कि आज़ादी के इतने साल बाद भी दलितों को घोड़ी नहीं चढ़ने दिया जाता है. दलित उत्पीड़न के ऐसे अपराधियों को सख्त सज़ा देनी होगी ताकि समाज में कड़ा सन्देश जाये.

Una Gujrat Schedule Caste were beaten by Swarna/ Twice Born Hindus July 2016
ऊना, गुजरात में अनुसूचित जाति के लोगो को पिटाई करते सवर्ण/ द्विज हिन्दू जुलाई 2016
यहाँ गौर कीजिए कि सवर्ण/ द्विज हिन्दू जिस लाठी से पिटाई कर रहें हैं उसे पुलिस इस्तेमाल करती है.

इन सभी मांगों में समाजवादी पार्टी की पूरी तरह सहमति रही है. पिछले कुछ सालों से समाजवादी पार्टी  सामाजिक न्याय के मुद्दों को जोर-शोर से उठा रही है. पार्टी अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव ने जातियों की आबादी के अनुपात में आरक्षण देने की बात की है. वे लगातर मोदी सरकार पर तेज आक्रमण कर रहें हैं. उनका कहना है कि 2019 के लोक सभा चुनाव में इस जन विरोधी मोदी सरकार को जाना होगा.

उनका कहना है कि मोदी सरकार में संविधान खतरे में हैं. अतः धर्मेंद्र यादव और अखिलेश यादव की विचार शैली एक ही है. अखिलेश यादव सांसद नहीं है इसलिए वे अपनी बात संसद नहीं रख सकते हैं.  संसद में पार्टी के विचारो को धर्मेंद्र यादव रखते हैं.

समाजवादी पार्टी की सामाजिक न्याय के मुद्दों और बहुजन समाज के प्रति संवेदनशील होती जा रही है.

इसके दो कारण हो सकते हैं. पहला, 2017 में उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने अखिलेश यादव के बंगले को गंगा जल से धुलवाया. गंगा जल से धुलवाकर योगी आदित्यनाथ ने यह संकेत दिया कि अखिलेश छोटी या पिछड़ी जाति के हैं. यह बात स्वयं अखिलेश यादव ने स्वीकार की है कि भाजपा सरकार ने मुझे अहसाह करा दिया कि मैं पिछड़े वर्ग का हिन्दू  हूँ. दूसरा कारण यह है कि भाजपा सरकार SC ST OBC का दमन कर रही है, उनके हितों की अनदेखी कर रही है.

समाजवादी पार्टी का अधिकांश वोटर यादव समुदाय का या मुस्लिम समुदाय का है. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से गंठबंधन के कारण दलित भी इसमें जुड़ गया है, इसलिए पार्टी को अपने वोटरों की चिंता करने के लिए अपनी नीतियों को दलित, पिछड़ा, मुस्लिम उन्मुखी होना पड़ रहा है.

ध्यान रखने की बात यह भी है समाजवादी पार्टी की सरकार (2012 – 2017) मे भी काफी ऐसे काम हुए जो दलितों, पिछडो के खिलाफ रहे हैं. ये पार्टी की तरफ से भी किये गए थे. लेकिन अब समय दूसरा है. पार्टी अब दलितों और पिछडो के पक्ष में हैं. वैसे भी राजनीति में कोई चीज़ निश्चित नहीं होती. बदलाव होता रहता है. अब जब भाजपा सरकार में दलितों और पिछडो पर जुल्म हो रहें हैं, उनके हितों की हकमारी हो रही है, समाजवादी पार्टी दलित और पिछडो के पक्ष में लड़ रही है. बसपा के साथ आने से उसे और मजबूती मिली है.

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ऑक्सफेम की रिपोर्ट पर आधारित समाचार और रिपोर्ट
(१)  https://www.businesstoday.in/current/economy-politics/oxfam-india-wealth-report-income-inequality-richests-poor/story/268541.html
(२) https://www.vox.com/future-perfect/2019/1/22/18192774/oxfam-inequality-report-2019-davos-wealth
(३) https://inequality.org/facts/global-inequality/
(४) https://www.livemint.com/Money/iH2aBEUDpG06hM78diSSEJ/Richest-10-of-Indians-own-over-34th-of-wealth-in-India.html