पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जन और सामाजिक न्याय विरोधी जजमेंट के खिलाफ पूरे देश में आक्रोश और आंदोलन हुए। इसी क्रम में पूरे देश में यूनिवर्सिटीयों में हड़ताल से लेकर पूरे देश में लोग सड़कों पर उतरें। 5 मार्च, 2019 को सफल भारत बंद का भी आयोजन किया गया। इसी दबाब में केंद्र सरकार को इससे संबंधित अध्यादेश लाना पड़ा। हालांकि केंद्र सरकार को प्रॉपर कानून बनाना चाहिए था।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) में भी काफी आंदोलन हुए। 7 मार्च, 2019 के अध्यादेश के बाद वहाँ के आंदोलनरत साथी ने यह प्रेस विज्ञप्ति जारी की, इसमें उन्होंने यूनिवर्सिटी को लोकतांत्रिक बनाने के लिए कई सुधाव दिये हैं साथ ही, लोगो से सुझाव भी मांगें हैं। उनकी प्रेस विज्ञप्ति को हम हु-ब-हु प्रकाशित कर रहें हैं-

आज 7 मार्च को केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा अंतिम कैबिनेट बैठक में 13 पॉइंट रोस्टर के खिलाफ अध्यादेश पारित कर दिया गया।उच्च शिक्षण संस्थाओं में आरक्षण बहाली के अध्यादेश की खबर के बाद आन्दोलन के योद्धाओं के साथ मिठाई खाई गई। इस आन्दोलन में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से भाग लेने वाले सभी व्यक्तियों और संगठनों को बहुत-बहुत बधाई दी गई।

अप्रैल 2017 में इस आंदोलन की शुरुआत BHU में इसी बैनर तले हुई थी, समस्या की शुरुआत भी BHU से ही हुई थी इसमें सफलता तभी मिल पाई जब ये पूरे देश की लड़ाई बन गई और पूरे देश के संस्थान इसकी चपेट में आ गए। लगातार लड़ी गई लड़ाई के बाद आज ये एक आधार पर स्थिर हुई है कि अब विश्वविद्यालय में नियुक्तियां सही है 49.5% को लागू करते हुए होनी चाहिए।

आज BHU के VT परिसर में आयोजित विजय जुलूस में बोलते हुए बहुजन चिन्तक प्रोफ. महेश प्रसाद अहिरवार ने कहा कि SC, ST, OBC के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में यह एक पड़ाव मात्र है, हमें इसे आगे भी जारी रखना होगा और इसका दायरा और व्यापक करना होगा ताकि यह कानून का रूप ले सके, साथ ही उन संस्थाओं में भी लागू किया जा सके जहां अब तक लागू ही नहीं किया गया है। केंद्रीय विश्वविद्यालय के अलावा राज्य विश्वविद्यालय व महाविद्यालय में आरक्षण को लागू नही होने दिया गया है ।NFS की प्रक्रिया जैसी कई समस्याएं है जिसकी वजह से बहुजनों का प्रतिनिधित्व पूरा नही हो पा रहा है। OBC, SC, ST, MT संघर्ष समिति BHU के अध्यक्ष रविन्द्र प्रकाश भारती ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा लाया गया अध्यादेश भाजपा और प्रधानमंत्री के मन मे व्याप्त डर का परिणाम है जो 5 मार्च के भारत बंद के बाद उनके अन्तर्मन में समा गया, आखिर क्या वजह रही कि वादा करने के बावजूद वह लगातार संसद में बिल लाने से बचती रही। सरकार को जब समझ आया कि SC, ST, OBC और न्यायप्रिय लोग पूरे तौर पर भाजपा को खारिज करने वाले है अगले चुनाव में, उसी डर से यह अध्यादेश लाया गया है।

आज के विजय जुलुश में राहुल भारती, राहुल यादव,डॉ विजय प्रकाश भारती, सूर्यमणि सूबेदार यादव, पिंकी गुप्ता, नेहा प्रकाश, रीता प्रसाद, शिवशंकर प्रजापति, मनीष भारती, दीपक युगांती, बालगोविंद सरोज, अनुराग,साकेत कुशवाहा,अजय भारती,लालचंद,अंकित कनौजिया, रितेश शुभराम, अजय भारती, राहुल सिंह,शुभम सिंह आदि साथी सम्मिलित रहे।

इस पूरे मामले पर आंदोलनकारी साथी विनय संघर्ष ने जरूरी बातें सामने रखी हैं- कुछ सवाल अभी भी बने हुए जो
सभी साथियों को बधाई पर लड़ाई अभी हम जीते नहीं हैं साथियो ! लड़ाई अभी हमें जारी रखने की जरूरत है। 200 प्वाइंट्स रोस्टर में भी अभी बहुत सारी कमियाँ हैं। आगे अभी हमें यह माँग रखने की जरूरत है-

  1. 13 प्वाइंट्स रोस्टर के आधार पर जहाँ भी रिक्तियां आई हैं उसे तत्काल रद्द किया जाएं।
  2. उसके बाद पहली माँग होनी चाहिए कि पहले बैकलॉग की सारी सीटें भरी जाएं और यह तब तक जारी रहें जब तक कि 49.5 % का प्रतिनिधित्व हमें मिल नहीं जाता।
  3. इसको भी हमें ध्यान रखने की जरूरत है कि यदि विश्वविद्यालय को इकाई मानकर रिक्तियां निकाली जायेंगी तो किस विषय को अनारक्षित श्रेणी में रखा जाएं और किसे आरक्षित श्रेणी में रखा जाएं ? कहीं ऐसा न हो कि अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत, इतिहास, भूगोल, रसायन विज्ञान, भौतिकी विज्ञान , जीव विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, गणित, इतिहास, भूगोल… जैसे विषय जिसमें कि छात्रों की संख्या अधिक रहती है उसे अनारक्षित श्रेणी में रख दिया जाएं और फ्रेंच, जर्मन, पालि, दर्शनशास्त्र, सैन्य विज्ञान… जैसे विषय जिसमें छात्रों की संख्या कम होती है उसे आरक्षित श्रेणी में रख दिया जाएं ?
  4. भविष्य में जब भी रिक्तियां आएं उसमें पहले आरक्षित पदों के लिए रिक्तियां आएं उसके बाद के पद अनारक्षित पदों के लिए हो। कहने का तात्पर्य यह है कि अगर 6 पद आएं तो प्रथम 3 पद आरक्षित हों और अंतिम 3 पद अनारक्षित हों।
  5. असिस्टेंट प्रोफेसर के साथ साथ एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के पदों में भी आरक्षण लागू किया जाएं।
  6. इसके अतिरिक्त कुछ अन्य महत्वपूर्ण सुझाव आपके मन में भी हो सकते हैं उसे भी जरूर बताएं।