जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी छात्र संघ (JNUSU) 2015 के चुनाव में मैंने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से बहुत सारी नाराजगियों, असहमतियों के चलते ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) के संभावनाशील होनहार प्रत्याशी कन्हैया कुमार के समर्थन में लोगों को वोट करने को कहता था ,और लोगों ने किया भी।

कन्हैया वह चुनाव AISA के सबसे अच्छे और कद्दावर एक्टिविस्ट को हराकर जीते। राजनीतिक सक्रियता के मामले में वह विजय कुमार के आसपास भी नहीं ठहरते।

उनकी जीत का मुख्य कारण बना उनका भाषण!

जीतते ही कुछ दिनों बाद कन्हैया के फर्जी क्रांतिकारिता की परत प्याज के छिलके की तरह परत दर परत उतरने लगी।

पहले तो उसने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के महत्त्व एवं योगदान को दरकिनार करते हुए उनके साथ व्यवहार किया। उसके इस तानाशाही पूर्ण रवैये से अज़ीज़ आकर उसके संगठन के कई लोगों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया। इसमें मुख्यतः दलित, पिछड़े और मुस्लिम थे।

JNUSU में रहते हुए तथा उसके बाद कन्हैया ने कुछ ऐसे कार्य किये जो किसी ने सोचा भी नहीं था।

उसने एक के बाद एक छात्र विरोधी और सामाजिक न्याय विरोधी फैसलों को अंजाम देने में प्रशासन का सहयोग किया। वह कार्य निम्न हैं…

1. कन्हैया कुमार ने बतौर JNUSU अध्यक्ष रहते हुए प्रवेश परीक्षा में द्विस्तरीय आरक्षण को समाप्त करने वाले चार्ट पर हस्ताक्षर किया।

2. छात्रवास में obc को मिलने वाले आरक्षण को खत्म करने वाले चार्ट पर हस्ताक्षर किया।

3. इन मुद्दों और फैकल्टी में आरक्षण के मुद्दे को जब ugbm में एक विषय के रूप में शामिल करने को कहा गया तो उसने अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए टेबल करने से मना कर दिया।

4. जब 2016 का गजट लागू किया जा रहा था तो उसके विरोध में सभी पार्टियां मिलकर आंदोलन चला रहीं थीं और यह बंधु नदारद.

5. एडमिन ब्लॉक कई दिनों तक जब छात्रों ने बन्द रखा तो एक दिन यह आये और लाल सलाम ले दे कर चलते बने।

6. उसके बाद 16 छात्रों पर प्रशासन ने जुर्माना लगाया और 9 छात्रों को निलंबित किया।

7 सभी छात्रों ने मिलकर फैसला किया कि जुर्माने नहीं भरना है तथा प्रशासन के इस फैसले को कोर्ट ले जाएंगे। JNUSU के अध्यक्ष कन्हैया कुमार यह कह कर जुर्माना चुकाने के फैसला करते हैं कि वह गरीब हैं उनके लिए मुंबई के मजदूरों ने पैसा चंदा करके भेजा है, इसलिए वह अपना जुर्माना भरेंगे , बाकी लोगों से कोई लेना देना नहीं है।

8. इसके बाद प्रशासन का फरमान आता है कि सभी स्टूडेंट की केंद्र में उपस्थिति अनिवार्य है। सभी पार्टियां और छात्र इसके विरोध में हैं और कन्हैया कुमार 100 प्रतिशत उपस्थिति के साथ अपनी थीसिस जमा करते हैं!

9. पिछले वर्ष कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया  (CPI) के राष्ट्रीय अधिवेशन में वह सीपीआई को ‘कंफ्यूज पार्टी ऑफ इंडिया’ कह चुके हैं!

बातें बहुत हैं लेकिन अभी बस इतनी ही।

अब सिर्फ एक सवाल ! अब आप बताएं कन्हैया कुमार पर क्यों कर विश्वास किया जाए ..?