चंद्रशेखर की अगुवाई में भीम आर्मी ने बहुजन अधिकार सुरक्षा यात्रा का आयोजन किया था. यात्रा 12 मार्च, 2019 से देवबंद से शुरू होकर 15 मार्च, 2019 को दिल्ली हुंकार रैली के साथ ख़त्म होना तय था. उत्तर प्रदेश पुलिस ने पहले रैली की इजाजत दी लेकिन बाद में चंद्रशेखर को गिरफ्तार कर लिया.

चंद्रशेखर के साथ-साथ आल इंडियन स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा/ AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुचेता डे , आइसा के उपाध्यक्ष फरहान अहमद और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (JNUSU) के अध्यक्ष एन. साईं बालाजी को भी गिरफ़्तार कर लिया.

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पहले रैली की अनुमति थी लेकिन बाद में पुलिस प्रशासन ने रैली की परमिशन रद्द कर दिया। जबकि ऐसा कोई नियम नहीं है कि चुनाव अचार संहिता के कारण किसी रैली की परमिशन रद्द आकर दी जाए. भारत में लोकतंत्र है और रैली निकालना और अपना रोष प्रकट करना लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा है.

इस गिरफ़्तारी के बाद गाँव वाले पुलिस की इस दादागीरी के ख़िलाफ़ इकट्ठे होने लगे.

इसमें पहले से ही ऑल इंडिया मेडिकल साइंस, नई दिल्ली से ईलाज करवा रहे चंद्रशेखर की तबीयत पुलिस के साथ धक्का मुक्की में और भी ख़राब हो गयी और वे बेसुध गिर गए.

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चंद्रशेखर की तबियत बिगड़ने के बाद मेरठ के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. पुलिस अस्पताल के बहार छावनी बनाकर बैठी हुई है.

तारा शंकर का कहना है कि अब पुलिस अस्पताल के बहार छावनी बनाकर बैठी है क्योंकि अब तक लाखों लोग चंद्रशेखर के पीछे जुड़ गये हैं और ऐसे ही वो हुंकारता रहा तो यूपी में भाजपा की हालत और ख़स्ता हो सकती है.

Crowed in Bhim Rally

तारा शंकर आगे कहतें हैं कि “एक अकेले दलित युवा ने इतना खौफ़ज़दा कर दिया है तुम्हें योगी आदित्यनाथ? याद रखना जितनी बार वो पिटेगा, जितनी बार वो गिरफ्तार होगा, उसके साथ लाखों दलित खड़े होते जायेंगे! उसके अंदर अटूट हिम्मत है! जियो चंद्रशेखर! ऐसे ही चांपे रहना! हम तुम्हारे साथ हैं!”

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