लखनऊ में 6 मार्च, 2019 को हिन्दू संगठनो द्वारा बिना किसी कारण के कश्मीरी युवको की पिटाई राष्ट्रीय मुद्दा बनता जा रहा है. कश्मीरी युवको को हिन्दू संगठन पुरे देश में टारगेट कर रहें हैं. जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी की भारतीय जनता पार्टी समर्थक प्रोफेसर अमिता सिंह ने भी कश्मीर के बारे में कहा था कि उन्हें 40 कश्मीरी युवको का बलिदान चाहिए। उनका यह बयान पुलवामा हमले के बाद आया था. मानो अमिता सिंह के लिए कश्मीर भारत का अंग ही न हो.

इन्हीं मुद्दों पर रिहार मंच 8 मार्च, 2019 को आंबेडकर प्रतिमा, हजरतगंज, लखनऊ में धरना-प्रदर्शन करने जा रहा है. उनका कहना है कि लखनऊ में कश्मीरी युवको हमले के लिए भाजपा की युगी सरकार जिम्मेदार है. उनका यह भी कहना है कि कश्मीरियों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के प्रति आपराधिक लापरवाही की गई. उन्होंने यह प्रेस रिलीज़ जारी किया –

लखनऊ 7 मार्च 2019. कश्मीरियों पर हो रहे हमले के ख़िलाफ़ लाटूश रोड स्थित रिहाई मंच कार्यालय पर लखनऊ के नागरिक समाज ने बैठक कर कश्मीरियों के ख़िलाफ़ फ़ैल रही नफरत पर चिंता व्यक्त की. एक स्वर में कहा कि हम कश्मीरियों के साथ हैं. गंगा जमुनी तहजीब पर संघी सरकार समर्थित गुंडों द्वारा किसी भी प्रकार से कश्मीरियों पर हमले को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. कल 8 मार्च को शाम साढ़े तीन बजे से अम्बेडकर प्रतिमा हज़रतगंज पर धरना होगा.

वक्ताओं ने कहा कि लखनऊ के डालीगंज पुल पर कल हुई घटना पुलिसिया प्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा करती है. ड्राई फ्रूटस बेच रहे कश्मीरी युवकों पर विश्व हिन्दू दल ट्रस्ट के नेताओं द्वारा हमला एक सोची समझी साजिश के तहत हुआ है. माननीय सर्वोच्च न्यायलय द्वारा पुलवामा घटना के बाद कश्मीरियों पर जगह-जगह हो रहे हमलों के ख़िलाफ़ देश के तमाम राज्यों को दिशा निर्देश देते हुए नोडल ऑफिसर नियुक्त करने का आदेश 22 फरवरी को जारी किया गया था.

मुख्य सचिव और डीजीपी को भी त्वरित कार्रवाई का निर्देश था कि ऐसी घटनाएं न होने पाएं  लेकिन  शासन-प्रशासन ने इस निर्देश के प्रति आपराधिक लापरवाही का रवैया अपनाया. इस पूरी घटना के लिए नोडल ऑफिसर से लेकर मुख्य सचिव और डीजीपी तक ज़िम्मेदार हैं. इस पूरी घटना की जांच माननीय सर्वोच्च न्यायलय के दिशा निर्देशन में हो. ये पहली घटना नहीं है. इससे पहले मुज़फ्फरनगर के खतौली स्थित शुगर मिल में भी कश्मीरी कामगारों के साथ मारपीट कर उन्हें निकाल दिया गया था. तब भी शासन प्रशासन द्वारा उदासीन रवैया अपनाया गया था जिसके परिणाम कल लखनऊ में हुई घटना थी.

बैठक में रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब, सृजनयोगी आदियोग, पिछड़ा महासभा के एह्शानुल हक़ मलिक, शिवनारायण कुशवाहा, सचेन्द्र यादव, यादव सेना के शिव कुमार यादव, जगन्नाथ यादव, कृष्ण कुमार यादव, रोबिन वर्मा, शाहरुख़ अहमद, मलिक शाहबाज, अजय शर्मा, विरेन्द्र कुमार गुप्ता, गुफरान चौधरी, समक्ष जायसवाल, मोहम्मद नासिर और राजीव यादव शामिल रहे.

प्रेस रिलीज़ द्वारा- रॉबिन वर्मा, रिहाई मंच, Rihai Manch: Resistance Against Repression