मेरी नौ दिनों की अक्लांत परिश्रम का परिणाम है यह पुस्तक जो आज प्रेस में चली गयी.

मित्रों, गत 17 मार्च को ‘सवर्ण और विभागवार आरक्षण..’ के दिल्ली में रिलीज के बाद जेहन से बड़ा उतर चुका था. 18 की रात बड़े सुकून के साथ लखनऊ रवाना हुआ.सुबह 7 बजे ट्रेन लखनऊ पहुंचने वाली थी.उसके पहले 5.30 बजे नीद टूट गयी . नींद टूटते ही लोकसभा चुनाव की अपनी भावी भूमिका की रूप-रेखा तैयार करने लगा .

अचानक मेरे जेहन में पुलवामा ब्लास्ट की घटना कौंध गयी. उसके पोलिटिकल इम्पैक्ट का आंकलन करते ही उस घटना के बाद राष्ट्रवादियों के चेहरे पर आई लाली और मोदी के आत्म-विश्वास की वापसी की बातें जेहन में खेलने लगी. याद आया ‘राष्ट्रवादी लहर’ के उठने की भाजपाइयों की दाम्भिक घोषणा. फिर तो पुलवामा का राजनीतिक इम्पैक्ट मुझे बुरी तरह परेशान करने लगा. और लखनऊ स्टेशन आते-आते पुलवामा जनित परेशानी से निजात पाने के लिए मैंने यथाशीघ्र एक किताब लाने का निर्णय ले लिया. सामने ऐतिहासिक 2 अप्रैल का भारत बंद दिवस था. मैंने इसी दिन को टारगेट कर एक छोटी किताब लाने का फैसला किया, जिसके जरिये पुलवामा से उभरी राष्ट्रवादी लहर की प्रभावी काट की जा सके.

मित्रों, 2009 से ही हर लोकसभा चुनाव में बहुजन डाइवर्सिटी मिशन की ओर से कुछ विशेष इनिशिएटिव लिया जाता रहा है.इस क्रम में लोकसभा चुनाव-2014 में 16 पेज की किताब निकाल कर लोगों को ऑनलाइन सुलभ कराया गया. इस बार इस किताब को अधिक से अधिक 48 पृष्ठों में तैयार करने की परिकल्पना किया. किन्तु यह बन गयी 72 पृष्ठों की .इसमें 16 पृष्ठों में मेरी लेखकीय और 23 में प्रायः दो दर्जन विद्वानों द्वारा दिया गया इस सवाल -लोग भाजपा को वोट न करें, इसके 5-10 कारण बताये-का जवाब है. बाकि में विषय से मैच करते मेरे नए-पुराने 6 लेख हैं, जिनमे वे दो लेख -(1)भाजपा की शक्ति के स्रोत और (2) बहुजनवादी दलों की शक्ति के स्रोत -भी हैं,जो भाजपा के खिलाफ रणनीति बनाने में दशकों तक इफेक्टिव रहेंगे.

लेकिन किताब का सबसे प्रभावी पार्ट गौतम मनीषा, पंजाब राव मेश्राम, जी. सिंह कश्यप, संजय रंजन, भीम शरण हंस, विशाल सागर, धर्मराज शास्त्री, राकेश कबीर,अजय मानव, बुद्ध शरण हंस, चंद्रभूषण सिंह यादव, गणपति मंडल, डॉ. रामविलास भारती, के. नाथ, निर्देश सिंह, गणेश रवि, कर्मेंदु शिशिर, अरसद सिराज मक्की, संजीव चन्दन, डॉ. जवाहर पासवान, प्रो. अजय तिवारी और फ्रैंक हुजूर द्वारा दिया साक्षात्कार है,जिसके बिना भाजपा-मुक्त भारत की परिकल्पना प्रस्तुत करना कठिन होता. किताब के प्रेस में जाने के बाद सबसे अधिक याद इन मनीषियों के अवदानो की आ रही है. चिरआभारी रहूँगा इनका.

4 अप्रैल के बाद साक्षात्कारदाताओं को ऑनलाइन यह किताब सुलभ कराना शुरू करूँगा.

इस किताब को ऑनलाइन लाखों लोगों तक फ्री सुलभ कराना है,कैसे यह मुमकिन होगा मैं नहीं जानता.इस विषय में आपके मार्ग दर्शन की जरुरत है.

यह पुस्तक बहुजन डाइवर्सिटी मिशन की ओर से उस चिड़िया जैसा एक तुच्छ प्रयास है,जो जंगल में आग लगने पर अपनी चोंच में पानी लाकर आग बुझाने का प्रयास की थी.

मेरा मानना है जिन्हें देश से प्यार है, उन्हें भाजपा को हराने में सारी शक्ति लगा देनी चाहिए. दावे के साथ कह सकता हूँ कि आजाद भारत में एक सत्ताधारी पार्टी को हराने की इतनी बड़ी जिम्म्मेवारी देश के विवेकवान मतदाताओं पर कभी नहीं आई .इस चुनाव का 1-10 तक लक्ष्य भाजपा -मुक्त भारत होना चाहिए.इस जरुरत का मुकम्मल अहसास कराने में यह पुस्तक पूरी तरह सक्षम है. भाजपा-मुक्त भारत की दिशा में कोई दल, विशेषकर बहुजनवादी यदि इमानदारी से प्रयास करता नहीं दिखता तो प्लीज उसे ऐसी सजा दें कि फिर ..

70 रूपये मूल्य की यह पुस्तक सिर्फ 30 रूपये प्रति कॉपी के हिसाब से सुलभ करायी जाएगी. लेकिन इसके लिए मिनिमम 25 कॉपी का आर्डर करना पड़ेगा. आर्डर मेरे मोबाईल न. पर देना होगा.