सुन लो राजनीतिक पर्यटको! बिहार में बेगूसराय है, तो भोजपुर भी है और सामाजिक न्याय का संघर्ष भी है! बेगूसराय की चेतना वाम के बेगूसराय मॉडल के दायरे में कैद नहीं है! भोजपुर से कतराकर बेगूसराय पहुंचने वाले पर्यटकों की राजनीतिक सीमा पकड़ी जाएगी! बेगूसराय आपको पर्यटक के बतौर ही लेगी!

बिहार का लेनिनग्राद कहे जाने वाला बेगूसराय लोकसभा चुनाव के दौर में राजनीतिक पर्यटन स्थल बनने जा रहा है.

प्रगतिशील और लोकतंत्रपसंद बुद्धिजीवियों, पत्रकारों, कलाकारों, सामाजिक, राजनीतिक कार्यकर्ताओं की बड़ी तादाद बेगूसराय पहुंचकर या फिर सोशल मीडिया में बेगूसराय के चुनाव में कन्हैया के पक्ष में खड़ा होकर लोकतंत्र के लिए प्रतिबद्धता का इजहार कर रहे हैं और ये प्रगतिशीलता का मुकुट धारण कर रहे हैं!

हम मान लेते हैं कि आप सब वाकई जाति विरोधी हैं, मनुवाद विरोधी हैं, फासीवाद के खिलाफ हैं,आप फासीवाद को हराना चाहते हैं,आप जनता की सामाजिक, राजनीतिक दावेदारी को बढ़ाना चाहते हैं!

बिहार में ही भोजपुर है,.वाम-लोकतांत्रिक आंदोलन का बेगूसराय से ज्यादा जीवंत एक मॉडल है, भोजपुर जो तमाम सीमाओं के बावजूद टिका हुआ है, डटा हुआ है, वहाँ लंबे समय से जमीनी आंदोलन से जुड़ा एक नौजवान राजू यादव चुनाव मैदान में है.

तमाम प्रगतिशील पर्यटक जो बेगूसराय आ रहे हैं, जो सोशल मीडिया पर कन्हैया के पक्ष में खड़ा होकर हौआ खड़ाकर रहे हैं- वेभोजपुर से गुजरते हुए बेगूसराय पहुंचें! वे कुछ शब्द राजू यादव के लिए भी खर्च करें! ऐसा नहीं करने पर मान लिया जा सकता है कि आप अभिजात्य और मनुवादी हैं!फैशनेबल फासीवाद विरोधी हैं और तब आपके लिए बेगूसराय ही पर्यटन स्थल हो सकता है! लेकिन,बेगूसराय आपके मेजबानों तक सीमित नहीं है!

सुन लो पर्यटकों! बिहार की चेतना बेगूसराय से ही नहीं बनती, वहां भोजपुर भी है.यहां शहीद जगदेव, कर्पूरी ठाकुर.जैसे नायक भी हुए हैं. यहां डॉ अंबेडकर के वारिस भी हैं. बिहार ललई सिंह यादव और रामस्वरूप वर्मा से भी परिचित है! बेगूसराय बिहार में ही है!