बेगूसराय के वामपंथियों और कन्हैया कुमार से कुछ सवाल

लेख वामपथ से कुछ सवाल कर रहा है. जब वामपंथी बोलतें हैं कि अगर आप कन्हैया के साथ आंख मूंदकर खड़ा नहीं हैं तो आप जातिवादी हैं! इसपर लेखक का कहना है कि वामपंथी जाति को नहीं मानते, तो तब ये दुसरो को जातिवादी कैसे बोलते हैं? इनको दुसरो को जातिवादी होने का सर्टिफिकेट देने का प्राधिकार किसने दिया है? यह मनुवादी श्रेष्ठताबोध का अहंकार है; जो इन लोगों ने लाल नकाब व प्रगतिशीलता के आवरण में छिपा रखा है!
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