Category: Campus

Genius Group द्वारा गाँव में सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन

Read More

विभाजनकारी लोगो का विभाजनकारी एजेंडा Ravindra Prakash Bhartiya

सवर्ण समाज के मनुवादी विभाजनकारी एजेंडा और इसके इतिहास पर प्रकाश डाल रहें हैं रविंदर प्रकाश भारतीय। यह भी कि कैसे श्रमण संस्कृति पर ब्राह्मणवादी संस्कृति ने शाजिस कर कब्ज़ा जमाया।

Read More

JNU में पिछड़ी – अतिपिछड़ी – पसमन्दा महिलाओं का सम्मेलन 2019: बहुजन महिलाओं का सम्मेलन

Read More

समाज में शिक्षा और सामाजिक न्याय: शिक्षा का बाजारीकरण और वर्तमान सरकार- अभिषेक आज़ाद

Read More

तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के बहुजन शिक्षकों डॉ. योगेंद्र महतो और डॉ. विलक्षण रविदास पर ABVP के गुंडों द्वारा हमले के खिलाफ साझा प्रतिवाद-प्रर्दशन

Read More

मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीड़न केस में नितीश कुमार के खिलाफ CBI जाँच के आदेश के बाद RLSP ने नैतिकता के आधार पर माँगा इस्तीफा

Read More

13 रिजर्वेशन पॉइंट रोस्टर पर कौशल पंवार से बातचीत

Read More

भाजपा जदयू के कार्यकाल में यूनिवर्सिटी में ABVP का बढ़ता गुंडागर्दी – सोनम कुमार, द नेशनल प्रेस

Read More

देश के संसाधनों और अवसरों पर पहला हक़ मूलनिवासी शोषित वंचित वर्गों का है! -एच. एल. दुसाध, द नेशनल प्रेस

Read More

जिसकी जितनी संख्या भारी: उसकी उतनी भागीदारी यह नारा लोक सभा चुनाव 2019 में घटित कर सकता है चमत्कार!- एच. एल. दुसाध, द नेशनल प्रेस

चुनाव में नारो के महत्त्व के साथ-साथ इसके महत्त्व के इतिहास को तथ्यों और उसके प्रभावों के साथ बता रहें हैं एच. एल. दुसाध. चुनाव में नारे उसी तरह काम करतें हैं जैसे विज्ञापन को दो लाइने किसी प्रोडक्ट को जन-जन तक पहुँचा देता है. लेकिन जनता अंतिम निर्णय उसके नारों के आधार पर नहीं बल्कि उसके कार्यात्मक गुणवत्ता के आधार पर देती है. यहाँ “जिसकी जितनी संख्या भारी: उसकी उतनी भागीदारी” के नारे में यह परिभाषित करना होगा कि किसकी संख्या? यह नारा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के लोग ज्यादा प्रयोग करतें हैं. जिसने पिछले चुनाव में अनुसूचित जाति के नाम पर जाटव/ चमार को टिकट दिया और दूसरी सबसे बड़ी अनुसूचित जाति वाल्मीकि को न एक भी टिकट लोक सभा चुनाव में दिया न एक भी टिकट विधान सभा में. आज वह समाजवादी पार्टी (सपा) (अखिलेश गुट) के साथ है. समाजवादी पार्टी ने भी समाजवाद या/और पिछड़ेवाद के नाम पर यादववाद किया है. इसलिए यह महत्वपूर्ण होगा कि प्रस्तावित नारा सभी जातियों को भी उसके संख्या के हिसाब से चुनाव में टिकट भी दे. साथ ही बसपा और सपा क्रमशः चार-चार यादव और जाटव/ चमार मुख्यमंत्री दे चुकें हैं ऐसे में उनके सम्बन्ध में यह नारा तभी लोगो को सार्थक लगेगा जब वे क्रमशः गैर-यादव और गैर-जाटव/ चमार मुख्यमंत्री भी प्रस्तावित करें. – संपादक, अनिल कुमार

Read More

भागलपुर में बहुजन प्रतिरोध लगातार जारी- सोनम कुमार, द नेशनल प्रेस

Read More

10 प्रतिशत सवर्ण आरक्षण और 13 पॉइंट रोस्टर के खिलाफ 7 फ़रवरी 2019 को होगा जोरदार विरोध मार्च और प्रदर्शन- सोनम कुमार, द नेशनल प्रेस

Read More
Loading