Category: Judgement

मार्क्सवादी व्याख्या: मूलनिवासियों की गुलामी से मुक्ति के लिए संख्यानुपात में सर्वव्यापी आरक्षण जरुरी! एच. एल. दुसाध

भारत के मूलनिवासियों के समस्याओं और इसके समाधान की मार्क्सवादी व्याख्या कर रहें हैं H L Dusadh Dusadh . यह व्याख्या इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि भारत में मार्क्सवाद की गलत व्याख्या हुई है. इसे सिर्फ वर्ग संघर्ष के रूप में देखा गया है लेकिन सिर्फ मालिक और मजदूर या फिर राज्य और मजदूर के संघर्ष के रूप में. जबकि यह संघर्ष बहुआयामी है जिसमें सांस्कृतिक-सामाजिक पक्ष ज्यादा महत्वपूर्ण और प्रासंगिक है.

जबकि मार्कस्वाद संस्कृति और धर्म के भूमिका को भी रेखांकित करता है. यह सांस्कृतिक प्रभाव का भी अध्ययन करता है.

प्रस्तुत लेख में साहूजी, पहले, पेरियार,नरंगुरु और आंबेडकर आदि भारतीय चिंतको के जिक्र के साथ साथ मार्क्सवाद को भारतीय परिप्रेक्ष्य में रखता है.

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