Category: Movement

जनता के सवालो पर संघर्षरत “झारखंड जनतांत्रिक महासभा” लड़ेगी लोक सभा चुनाव 2019

Read More

होलिका दहन और सती प्रथा में समानता: इतिहास और पुराण का स्त्रीवादी विश्लेषण- आँचल

Read More

आरक्षण के खिलाफ BHU के मनुवादी आंदोलन से उठते प्रश्न Ravindra Prakash Bhartiya

मनुवादी समानता और सामान अवसर विरोधी क्यों हैं? इसपर रविंद्र प्रकाश भारती न सिर्फ सवाल कर रहें हैं बल्कि इसका विश्लेषण भी कर रहें हैं.

Read More

क्या मायावती कांशीराम के भागीदारी दर्शन का सदव्यवहार करने के लिए आगे बढेंगी H. L. Dusadh

Read More

विभाजनकारी लोगो का विभाजनकारी एजेंडा Ravindra Prakash Bhartiya

सवर्ण समाज के मनुवादी विभाजनकारी एजेंडा और इसके इतिहास पर प्रकाश डाल रहें हैं रविंदर प्रकाश भारतीय। यह भी कि कैसे श्रमण संस्कृति पर ब्राह्मणवादी संस्कृति ने शाजिस कर कब्ज़ा जमाया।

Read More

कश्मीरियों पर हुए हमले के खिलाफ रिहाई मंच करेगा प्रदर्शन

Read More

बहुजन आंदोलन की जीत पर प्रसन्नता और 5 मार्च 2019 के भारत बंद के दौरान मुकदमे और गिरफ़्तारी की निंदा- सोनम कुमार

5 मार्च, 2019 को शोषित वंचित जातियों द्वारा सफल भारत आयोजित किया गया था. लेकिन भारत बंद समर्थको पर फर्जी आरोप लगाकर उनको गिरफ्तार किया गया था. लोगो में इसके प्रति रोष है. साथ ही भारत सरकार द्वारा 7.3.2019 को 13 पॉइंट रिजर्वेशन रोस्टर ख़तम करने के अध्यादेश लाने पर .ख़ुशी भी है,

Read More

भागलपुर में सैकड़ो छात्र यूनिवर्सिटी बंद कराते हुए भारत बंद में सफल भागलपुर बंद किया सोनम कुमार

संविधान व सामाजिक न्याय विरोधी सवर्ण आरक्षण, विश्वविद्यालयों में शिक्षक नियुक्ति में विभागवार 13 प्वाइंट रोस्टर और जंगल-जमीन से लाखों आदिवासियों की बेदखली की साजिश के खिलाफ भारत बंद पुरे भारत में सफल रहा. भागलपुर से रिपोर्ट सोनम कुमार की रिपोर्ट।

Read More

मार्क्सवादी व्याख्या: मूलनिवासियों की गुलामी से मुक्ति के लिए संख्यानुपात में सर्वव्यापी आरक्षण जरुरी! एच. एल. दुसाध

भारत के मूलनिवासियों के समस्याओं और इसके समाधान की मार्क्सवादी व्याख्या कर रहें हैं H L Dusadh Dusadh . यह व्याख्या इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि भारत में मार्क्सवाद की गलत व्याख्या हुई है. इसे सिर्फ वर्ग संघर्ष के रूप में देखा गया है लेकिन सिर्फ मालिक और मजदूर या फिर राज्य और मजदूर के संघर्ष के रूप में. जबकि यह संघर्ष बहुआयामी है जिसमें सांस्कृतिक-सामाजिक पक्ष ज्यादा महत्वपूर्ण और प्रासंगिक है.

जबकि मार्कस्वाद संस्कृति और धर्म के भूमिका को भी रेखांकित करता है. यह सांस्कृतिक प्रभाव का भी अध्ययन करता है.

प्रस्तुत लेख में साहूजी, पहले, पेरियार,नरंगुरु और आंबेडकर आदि भारतीय चिंतको के जिक्र के साथ साथ मार्क्सवाद को भारतीय परिप्रेक्ष्य में रखता है.

Read More

सवर्ण आरक्षण, 13 पॉइंट रोस्टर और जंगल से आदिवासियों के बेदखल के खिलाफ 5 मार्च 2019 को भागलपुर में बहुजन समाज भारी तादाद में सड़कों पर उतरेगा

Read More

जनांदोलनों का संयुक्त मोर्चा, झारखण्ड उतरेगा लोक सभा चुनाव में, चार पे दावेदारी, चौदह पर तैयारी – सोनम कुमार

Read More

JNU में पिछड़ी – अतिपिछड़ी – पसमन्दा महिलाओं का सम्मेलन 2019: बहुजन महिलाओं का सम्मेलन

Read More
Loading