Category: Discourse

भारतीय परम्पराओं को आर्य लेखकों ने विकृत किया: होरी/ होली के विशेष संदर्भ में- सुरेश प्रसाद

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होलिका दहन और सती प्रथा में समानता: इतिहास और पुराण का स्त्रीवादी विश्लेषण- आँचल

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बहुजन डाइवर्सिटी बनाम छद्म राष्ट्रवाद H. L. Dusadh

बहुजन डाइवर्सिटी बनाम छद्म राष्ट्रवाद पर H. L. Dusadh ने दर्शाया है कि बहुजन डाइवर्सिटी मिशन के एजेंडे के समक्ष छद्म राष्ट्रवाद तिनकों की भांति उड़ जायेगा। उन्होंने भोपाल घोषणापत्र और डाइवर्सिटी मिशन के असर की पर भी विस्तृत चर्चा की है. पढ़े और शेयर करें।

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निजी क्षेत्र में आरक्षण की सीमाबद्धता समझें- एच. एल. दुसाध

सामाजिक न्याय की लड़ाई ऐसी हो गई कि आरक्षण को सभी समस्यायों का एकमात्र हल के रूप में देखा जाने लगा है. देश के सभी संसाधनों पर सभी का हक़ है इसलिए सबका प्रतिनिधित्व होना चाहिए लेकिन आरक्षण सभी समस्यायों का हल नहीं है। यह कहने की हिम्मत होनी चाहिए। आप पूरा लेख पढ़ें और आलोचनात्मक कमेंट करें। बहस को आगे बढ़ने के लिए इसे शेयर भी करें।

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शर्मसार करती सवर्णवादी मीडिया की भूमिका की पड़ताल: सामाजिक न्याय की अनदेखी के लिए क्यों अभिशप्त है “मुख्यधारा” की मीडिया!

भारत की भ्रष्ट्र ब्राह्मणवादी-सवर्णवादी मीडिया की भूमिका की पड़ताल कर रहें हैं एच. एल. दुसाध। वे भाजपा के पक्ष में युद्ध उन्माद की विश्लेषण कर के साथ-साथ इसे राष्ट्रवाद की दृष्टि से भी देख रहें हैं.

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मार्क्सवादी व्याख्या: मूलनिवासियों की गुलामी से मुक्ति के लिए संख्यानुपात में सर्वव्यापी आरक्षण जरुरी! एच. एल. दुसाध

भारत के मूलनिवासियों के समस्याओं और इसके समाधान की मार्क्सवादी व्याख्या कर रहें हैं H L Dusadh Dusadh . यह व्याख्या इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि भारत में मार्क्सवाद की गलत व्याख्या हुई है. इसे सिर्फ वर्ग संघर्ष के रूप में देखा गया है लेकिन सिर्फ मालिक और मजदूर या फिर राज्य और मजदूर के संघर्ष के रूप में. जबकि यह संघर्ष बहुआयामी है जिसमें सांस्कृतिक-सामाजिक पक्ष ज्यादा महत्वपूर्ण और प्रासंगिक है.

जबकि मार्कस्वाद संस्कृति और धर्म के भूमिका को भी रेखांकित करता है. यह सांस्कृतिक प्रभाव का भी अध्ययन करता है.

प्रस्तुत लेख में साहूजी, पहले, पेरियार,नरंगुरु और आंबेडकर आदि भारतीय चिंतको के जिक्र के साथ साथ मार्क्सवाद को भारतीय परिप्रेक्ष्य में रखता है.

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“राष्ट्रवादी लहर” को मलान कर सकता है संख्यानुपात में आरक्षण का मुद्दा- एच. एल. दुसाध, द नेशनल प्रेस

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भाजपा सरकार के देशप्रेम का पर्दाफास: शहीद विजय सोरेंगे के आदिवासी होने कारण भेदभाव, उनके नाम पर चौंक का नामकरण करने पर भाजपा पुलिस ने किया गिरफ्तार- द नेशनल प्रेस

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संवेदना प्रदर्शित करने का संवेदनहीन दौर: सन्दर्भ पुलवामा आतंकी हमला- अभिषेक आज़ाद

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समाज में शिक्षा और सामाजिक न्याय: शिक्षा का बाजारीकरण और वर्तमान सरकार- अभिषेक आज़ाद

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जननायक कर्पूरी ठाकुर के मृत्युदिवस के अवसर पर ‘सवर्ण आरक्षण: संविधान बचाओ-देश बचाओ राष्ट्रीय अभियान’- सोनम कुमार, द नेशनल प्रेस

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उच्च शिक्षा में शोषित वंचित समाज की भागीदारी की स्थिति और अदालती आदेश के विरुद्ध नए कानून की जरुरत Ravindra Prakash Bhartiya

उच्च शिक्षा में शोषित वंचित समाज की भागीदारी को आंकड़ों में दर्शाकर अदालती आदेश के विरुद्ध विभागवार रिजर्वेशन रोस्टर की जगह यूनिवर्सिटी और कॉलेज को यूनिट मानने की जरुरत बता रहें हैं रविंद्र प्रकाश भारतीय।

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