Category: Policy and Society

“सवर्ण आरक्षण” के लिए संविधान संसोधन और सामाजिक न्याय के कथित योद्धाओं की भूमिका- विश्वंभर नाथ प्रजापति

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बहुजन तानाशाही कारण बन सकती है भयावह सापेक्षिक वंचना- एच. एल. दुसाध H L Dusadh

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भागलपुर में बहुजन प्रतिरोध लगातार जारी- सोनम कुमार, द नेशनल प्रेस

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10 प्रतिशत सवर्ण आरक्षण और 13 पॉइंट रोस्टर के खिलाफ 7 फ़रवरी 2019 को होगा जोरदार विरोध मार्च और प्रदर्शन- सोनम कुमार, द नेशनल प्रेस

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क्या तथाकथित द्विज सवर्ण जाति भी आरक्षण के पात्र हो सकते हैं! – एच. एल. दुसाध, द नेशनल प्रेस

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ब्राह्मणवाद के गढ़ BHU में 13 पॉइंट रोस्टर का विरोध: सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ प्रदर्शन और भाजपा का पुतला दहन

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चौधरी चरण सिंह के जयंती पर राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा का पूरा भाषण

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प्रतिनिधित्व (आरक्षण) का बँटवारा: प्रतिनिधित्व का लोकतान्त्रिक विस्तार या “घर तोड़ने की साजिश”

“घर तोड़ने की साजिश” की बात पहली बार तब की गई थी जब जब अंग्रेजो ने भारत सरकार अधिनियम के तहद दो वर्गों को सरकारी नियुक्तियों में प्रतिनिधित्व (आरक्षण) दिया था जिसे अनुसचित जनजाति और अनुसूचित जाति के रूप में पहचान की गई थी. दूसरी बार इसे महात्मा गाँधी आंबेडकर के सामने दुहराते हैं (पुना पैक्ट), तीसरी बार कर्पूरी ठाकुर द्वारा मुंगेरीलाल कमीशन लागु करने के बाद और चौथी बार मंडल कमीशन लागु करने के बाद दुहराया जाता है. आज फिर “घर तोड़ने की साजिश” की बात हो रही है. कनकलता यादव का विश्लेषण पढ़िए और लेख पर आलोचनात्मक कमेंट करें- संपादक

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संविधान का संतुलन बिगड़ गया है, न्यायपालिका तानाशाह हो गई है: 3 दिसंबर, 2018 को न्यायपालिका का घेराव करेंगें डॉ. उदित राज

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अभिवक्ति की आजादी और शिक्षा के लोकतंत्रीकरण के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी में भगत सिंह छात्र एकता मंच का भूख हड़ताल

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संविधान दिवस पर विशेष: संविधान के उद्देश्यों से खिलवाड़ करने में नरेंद्र मोदी अव्वल

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लोकतंत्र और निरंकुशता: मतदाता ही लोकतंत्र में किसी विचारधारा और सरकार को निरंकुश होने से बचाता है

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